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पंचक मुहूर्त 2027

पंचक मुहूर्त 2027

✍️ Pandit Rajkumar Dubey  |  🕒 07 Nov 2026  |  📂 मुहूर्त 2027  |  ⏱ 16 मिनट पढ़ें

Panchak Muhurat 2027: पंचक कब से कब तक है और पंचक में क्या करें?

Panchak Muhurat 2027: भारतीय ज्योतिष में मुहूर्त का विशेष महत्व माना गया है। किसी महत्वपूर्ण कार्य को प्रारंभ करने से पहले तिथि, वार, नक्षत्र, योग और अन्य पंचांग तत्वों का विचार करने की परंपरा रही है। इसी क्रम में पंचक भी ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण विषय है। पंचक का संबंध चंद्रमा के कुछ विशेष नक्षत्रों में गोचर से माना जाता है। इस अवधि को लेकर हमारे ज्योतिषीय ग्रंथों और परंपराओं में कुछ कार्यों के संबंध में विशेष सावधानियाँ बताई गई हैं।

इस लेख में आपको Panchak Muhurat 2027 के अंतर्गत वर्ष 2027 में आने वाले पंचक की प्रारंभ और समाप्ति तिथि एवं समय, पंचक के प्रकार, पंचक में क्या करना चाहिए और किन कार्यों से बचने की परंपरा है—इन सभी विषयों की जानकारी दी जा रही है।

महत्वपूर्ण सूचना: पंचक के संबंध में विभिन्न परंपराओं और पंचांगों में मान्यताओं का विवरण कुछ अलग हो सकता है। यहाँ दी गई जानकारी पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। किसी विशेष कार्य के लिए व्यक्तिगत या स्थान-विशेष मुहूर्त आवश्यक हो तो स्थानीय पंचांग एवं योग्य ज्योतिषी से परामर्श किया जा सकता है।


पंचक क्या है?

चंद्रमा के भ्रमण से बनने वाले एक विशेष योग को पंचक कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष में आकाश मंडल को 12 राशियों और 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र की ओर आगे बढ़ता है। जब चंद्रमा कुछ विशेष नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तब पंचक की अवधि मानी जाती है.

पंचक में मुख्य रूप से निम्न पाँच नक्षत्रों का विचार किया जाता है:

  1. धनिष्ठा — तृतीय चरण से
  2. शतभिषा
  3. पूर्वाभाद्रपद
  4. उत्तराभाद्रपद
  5. रेवती

इन नक्षत्रों से होकर चंद्रमा के गोचर की अवधि लगभग पाँच दिनों के आसपास होती है। इसी कारण इसे पंचक कहा जाता है।

पंचक नक्षत्र कौन-कौन से हैं?

पंचक के अंतर्गत मुख्य रूप से धनिष्ठा के तृतीय एवं चतुर्थ चरण तथा शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों का विचार किया जाता है। ज्योतिषीय परंपरा में इन नक्षत्रों में चंद्रमा के गोचर के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी गई है, जबकि कुछ कार्य परिस्थितिनुसार किए जा सकते हैं। इसलिए पंचक को केवल “हर काम के लिए अशुभ समय” मानना उचित नहीं है। कार्य की प्रकृति और पंचक के प्रकार के अनुसार विचार किया जाता है।

पंचक कितने प्रकार के होते हैं?

पंचक की शुरुआत जिस वार से होती है, उसके आधार पर पारंपरिक ज्योतिष में पंचक के पाँच प्रकार बताए जाते हैं:

  • रोग पंचक: रविवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस पंचक में स्वास्थ्य संबंधी तथा अत्यधिक कष्ट देने वाले कार्यों को लेकर सावधानी रखनी चाहिए। विशेष रूप से शुभ कार्य करते समय पंचांग के अन्य योगों का भी विचार किया जाता है।
  • राज पंचक: सोमवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को राज पंचक कहा जाता है। परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता में इसे संपत्ति तथा राजकीय कार्यों के लिए उपयोगी माना गया है। सरकारी कार्यों और संपत्ति से जुड़े कार्यों में इसके संबंध में विशेष विचार किया जाता है।
  • अग्नि पंचक: मंगलवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को अग्नि पंचक कहा जाता है। परंपरा में इस पंचक के दौरान अग्नि, निर्माण तथा जोखिम से जुड़े कार्यों में विशेष सावधानी रखने की बात कही गई है।
  • चोर पंचक: शुक्रवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को चोर पंचक कहा जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में यात्रा, व्यापार, लेन-देन तथा महत्वपूर्ण सौदों के संबंध में सावधानी रखी जाती है।
  • मृत्यु पंचक: शनिवार से प्रारंभ होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है। परंपरागत मान्यता में इस पंचक को जोखिम वाले कार्यों के लिए सावधानी का समय माना गया है। इसलिए इस अवधि में अनावश्यक जोखिम लेने से बचने और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उचित मुहूर्त देखने की सलाह दी जाती है।

पंचक में क्या नहीं करना चाहिए?

ज्योतिषीय एवं धार्मिक परंपराओं में पंचक के दौरान कुछ कार्यों को वर्जित या टालने योग्य माना गया है। विशेष रूप से निम्न कार्यों के संबंध में सावधानी बताई जाती है:

  • दक्षिण दिशा की यात्रा
  • घर की छत डालना
  • लकड़ी से संबंधित कुछ कार्य
  • चारपाई बनवाना
  • बिस्तर आदि खरीदना
  • मृत्यु संस्कार से संबंधित कुछ विशेष सामग्री की खरीद

इन नियमों का पालन क्षेत्रीय परंपरा और पारिवारिक मान्यता के अनुसार अलग-अलग भी हो सकता है।

पंचक में क्या किया जा सकता है?

पंचक के संबंध में यह समझना आवश्यक है कि प्रत्येक कार्य को हर परिस्थिति में वर्जित नहीं माना जाता। कुछ नक्षत्रों और कार्यों को परंपरागत रूप से शुभ माना गया है। इसलिए किसी कार्य के लिए केवल यह देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए कि पंचक चल रहा है या नहीं। कार्य की प्रकृति, नक्षत्र, तिथि, वार और अन्य पंचांग तत्वों का विचार करके मुहूर्त निर्धारित किया जा सकता है।


Panchak Muhurat 2027: महीनेवार तिथियां एवं समय

1. पंचक मुहूर्त जनवरी 2027

  • पंचक आरम्भ: 11 जनवरी 2027, सोमवार — शाम 04:34 बजे से
  • पंचक समाप्त: 15 जनवरी 2027, शुक्रवार — रात्रि 11:51 बजे तक।

2. पंचक मुहूर्त फरवरी 2027

  • पंचक आरम्भ: 07 फरवरी 2027, रविवार — प्रातः 10:36 बजे से
  • पंचक समाप्त: 12 फरवरी 2027, शुक्रवार — प्रातः 05:42 बजे तक।

3. पंचक मुहूर्त मार्च 2027

  • पंचक आरम्भ: 06 मार्च 2027, शनिवार — शाम 05:34 बजे से
  • पंचक समाप्त: 11 मार्च 2027, बृहस्पतिवार — प्रातः 11:19 बजे तक।

4. पंचक मुहूर्त अप्रैल 2027

  • पंचक आरम्भ: 03 अप्रैल 2027, शनिवार — रात्रि 01:32 बजे से
  • पंचक समाप्त: 07 अप्रैल 2027, बुधवार — शाम 06:25 बजे तक।

5. पंचक मुहूर्त अप्रैल-मई 2027

  • पंचक आरम्भ: 30 अप्रैल 2027, शुक्रवार — प्रातः 09:53 बजे से
  • पंचक समाप्त: 05 मई 2027, बुधवार — प्रातः 03:14 बजे तक।

6. पंचक मुहूर्त मई-जून 2027

  • पंचक आरम्भ: 27 मई 2027, बृहस्पतिवार — शाम 05:49 बजे से
  • पंचक समाप्त: 01 जून 2027, मंगलवार — दोपहर 12:49 बजे तक।

7. पंचक मुहूर्त जून 2027

  • पंचक आरम्भ: 24 जून 2027, बृहस्पतिवार — रात्रि 12:50 बजे से
  • पंचक समाप्त: 28 जून 2027, सोमवार — रात्रि 09:48 बजे तक।

8. पंचक मुहूर्त जुलाई 2027

  • पंचक आरम्भ: 21 जुलाई 2027, बुधवार — प्रातः 07:04 बजे से
  • पंचक समाप्त: 26 जुलाई 2027, सोमवार — प्रातः 05:13 बजे तक।

9. पंचक मुहूर्त अगस्त 2027

  • पंचक आरम्भ: 17 अगस्त 2027, मंगलवार — दोपहर 01:04 बजे से
  • पंचक समाप्त: 22 अगस्त 2027, रविवार — प्रातः 11:10 बजे तक।

10. पंचक मुहूर्त सितंबर 2027

  • पंचक आरम्भ: 13 सितम्बर 2027, सोमवार — शाम 07:33 बजे से
  • पंचक समाप्त: 18 सितम्बर 2027, शनिवार — शाम 04:47 बजे तक।

11. पंचक मुहूर्त अक्टूबर 2027

  • पंचक आरम्भ: 11 अक्टूबर 2027, सोमवार — रात्रि 02:55 बजे से
  • पंचक समाप्त: 15 अक्टूबर 2027, शुक्रवार — रात्रि 11:29 बजे तक।

12. पंचक मुहूर्त नवंबर 2027

  • पंचक आरम्भ: 07 नवम्बर 2027, रविवार — प्रातः 10:59 बजे से
  • पंचक समाप्त: 12 नवम्बर 2027, शुक्रवार — प्रातः 07:55 बजे तक।

13. पंचक मुहूर्त दिसंबर 2027

  • पंचक आरम्भ: 04 दिसम्बर 2027, शनिवार — शाम 07:07 बजे से
  • पंचक समाप्त: 09 दिसम्बर 2027, बृहस्पतिवार — शाम 05:27 बजे तक।

पंचक से जुड़े सामान्य प्रश्न और उनके उत्तर (FAQ)

1. पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा क्यों नहीं करनी चाहिए?

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को कुछ परिस्थितियों में टालने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से यदि यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण हो तो यात्रा के लिए अलग से शुभ मुहूर्त और पंचांग का विचार किया जा सकता है।

2. क्या पंचक में संपत्ति खरीद सकते हैं?

पंचक के दौरान संपत्ति संबंधी कार्यों के विषय में निर्णय केवल पंचक देखकर नहीं करना चाहिए। किसी विशेष दिन संपत्ति खरीदने के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग और अन्य पंचांग तत्वों का विचार किया जा सकता है। यदि व्यक्तिगत मुहूर्त चाहिए तो जन्म कुंडली के आधार पर भी विचार किया जा सकता है।

3. क्या पंचक में विवाह किया जा सकता है?

पंचक को सामान्य रूप से विवाह के लिए विशेष मुहूर्त नहीं माना जाता। विवाह के लिए अलग से विवाह मुहूर्त निर्धारित किया जाता है, जिसमें तिथि, नक्षत्र, लग्न आदि का विचार किया जाता है। यदि विवाह की तारीख पंचक की अवधि में आ रही हो, तो व्यक्तिगत एवं स्थान-विशेष पंचांग के अनुसार योग्य ज्योतिषी से परामर्श करना उचित रहेगा।

4. क्या पंचक में गृह प्रवेश किया जा सकता है?

गृह प्रवेश एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इसलिए पंचक के दौरान गृह प्रवेश करने से पहले उस दिन के संपूर्ण पंचांग और गृह प्रवेश के लिए उपलब्ध शुभ मुहूर्त का विचार करना चाहिए। केवल पंचक चल रहा है या नहीं, इसके आधार पर अंतिम निर्णय लेना उचित नहीं है।

5. क्या पंचक में यात्रा कर सकते हैं?

पारंपरिक मान्यता में पंचक के दौरान विशेष रूप से दक्षिण दिशा की यात्रा को टालने की सलाह दी गई है। यदि यात्रा आवश्यक हो तो यात्रा के लिए उपलब्ध शुभ समय, दिशा और अन्य पंचांग तत्वों का विचार किया जा सकता है।

6. क्या पंचक में नया काम शुरू कर सकते हैं?

नए कार्य के लिए केवल पंचक को देखकर निर्णय नहीं किया जाना चाहिए। कार्य की प्रकृति के अनुसार शुभ तिथि, वार, नक्षत्र और लग्न का विचार किया जा सकता है। कुछ कार्य पंचक में भी परंपरागत रूप से किए जाते हैं, इसलिए कार्य विशेष के अनुसार मुहूर्त देखना अधिक उचित है।

7. क्या पंचक हर महीने आता है?

चंद्रमा के नक्षत्रों में भ्रमण के कारण पंचक की अवधि लगभग प्रत्येक 27 दिनों के आसपास पुनः आती है। इसलिए एक वर्ष में कई बार पंचक की अवधि आती है। वर्ष 2027 के लिए ऊपर जनवरी से दिसंबर तक पंचक की सभी दी गई अवधियों को क्रम से प्रस्तुत किया गया है।

8. पंचक में क्या सावधानी रखनी चाहिए?

पंचक के दौरान महत्वपूर्ण कार्य करना हो तो निम्न बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

  • कार्य की प्रकृति के अनुसार मुहूर्त देखें।
  • पंचांग के अन्य अंगों का भी विचार करें।
  • अनावश्यक जोखिम वाले कार्यों से बचें।
  • महत्वपूर्ण यात्रा के लिए शुभ समय देखें।
  • संपत्ति, विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े कार्यों के लिए अलग से विशिष्ट मुहूर्त देखें।
  • व्यक्तिगत आवश्यकता होने पर जन्म कुंडली के आधार पर मुहूर्त निर्धारित कराएँ।

निष्कर्ष

Panchak Muhurat 2027 ज्योतिष और पंचांग की महत्वपूर्ण जानकारी में से एक है। पंचक चंद्रमा के कुछ विशेष नक्षत्रों में गोचर से संबंधित माना जाता है और इसकी अवधि लगभग पाँच दिनों के आसपास रहती है। पारंपरिक ज्योतिष में पंचक के दौरान कुछ कार्यों को टालने तथा कुछ कार्यों में विशेष सावधानी रखने की सलाह दी गई है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पंचक की पूरी अवधि में प्रत्येक प्रकार का कार्य वर्जित होता है।

किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए केवल पंचक को देखकर निर्णय लेने के बजाय तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, लग्न और कार्य की प्रकृति का समग्र विचार करना अधिक उचित है।

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