Purnima Vrat 2027: सभी पूर्णिमा एवं अमावस्या की तिथियां, व्रत का महत्व और पूजा विधि
Purnima Vrat 2027: पूर्णिमा तिथि शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रकाशित दिखाई देता है। हिंदू धर्म और पुराणों में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। वर्ष 2027 में कुल 12 पूर्णिमा और 13 अमावस्या पड़ेंगी। इस वर्ष अधिकमास नहीं होने के कारण हिंदू पंचांग के अनुसार सामान्यतः 12 चंद्र मास रहेंगे।
पुराणों के अनुसार पूर्णिमा के दिन किया गया दान-पुण्य अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है। पूर्णिमा का व्रत करने से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, धन-धान्य, यश और समृद्धि आती है तथा मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन व्यक्तियों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो, उन्हें पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। इस दिन चंद्रमा को जल अर्पित करने से मानसिक शांति और मनोबल की वृद्धि के लिए शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है। साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
विशेषकर पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा एवं पूजा करने से पारिवारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। घर में सुख-शांति बनी रहती है तथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
Purnima Vrat & Amavasya 2027 – माहवार तिथियां
वर्ष 2027 में पड़ने वाली सभी पूर्णिमा एवं अमावस्या की तिथियां निम्नलिखित हैं। यहां प्रत्येक तिथि के प्रारंभ और समाप्त होने का समय भी दिया गया है।
जनवरी 2027
- 07 जनवरी 2027, गुरुवार – पौष कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 06 जनवरी रात्रि 11:13 बजे से | तिथि समाप्त 08 जनवरी प्रातः 01:53 बजे तक।
- 22 जनवरी 2027, शुक्रवार – पौष शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 21 जनवरी रात्रि 09:29 बजे से | तिथि समाप्त 22 जनवरी सायं 05:46 बजे तक।
फरवरी 2027
- 06 फरवरी 2027, शनिवार – माघ कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 05 फरवरी सायं 07:05 बजे से | तिथि समाप्त 06 फरवरी रात्रि 09:25 बजे तक।
- 20 फरवरी 2027, शनिवार – माघ शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 20 फरवरी प्रातः 07:59 बजे से | तिथि समाप्त 21 फरवरी प्रातः 04:52 बजे तक।
मार्च 2027
- 08 मार्च 2027, सोमवार – फाल्गुन कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 07 मार्च दोपहर 01:46 बजे से | तिथि समाप्त 08 मार्च दोपहर 02:58 बजे तक।
- 22 मार्च 2027, सोमवार – फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 21 मार्च सायं 06:21 बजे से | तिथि समाप्त 22 मार्च सायं 04:13 बजे तक।
अप्रैल 2027
- 06 अप्रैल 2027, मंगलवार – चैत्र कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 06 अप्रैल प्रातः 05:40 बजे से | तिथि समाप्त 07 अप्रैल प्रातः 05:20 बजे तक।
- 20 अप्रैल 2027, मंगलवार – चैत्र शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 20 अप्रैल प्रातः 04:51 बजे से | तिथि समाप्त 21 अप्रैल प्रातः 03:56 बजे तक।
मई 2027
- 06 मई 2027, गुरुवार – वैशाख कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 05 मई सायं 06:16 बजे से | तिथि समाप्त 06 मई सायं 04:27 बजे तक।
- 20 मई 2027, गुरुवार – वैशाख शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 19 मई सायं 04:02 बजे से | तिथि समाप्त 20 मई सायं 04:28 बजे तक।
जून 2027
- 04 जून 2027, शुक्रवार – ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 04 जून प्रातः 04:05 बजे से | तिथि समाप्त 05 जून रात्रि 01:09 बजे तक।
- 18 जून 2027, शुक्रवार – ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 18 जून प्रातः 04:34 बजे से | तिथि समाप्त 19 जून प्रातः 06:13 बजे तक।
जुलाई 2027
- 04 जुलाई 2027, रविवार – आषाढ़ कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 03 जुलाई दोपहर 12:05 बजे से | तिथि समाप्त 04 जुलाई प्रातः 08:31 बजे तक।
- 18 जुलाई 2027, रविवार – आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 17 जुलाई सायं 06:48 बजे से | तिथि समाप्त 18 जुलाई रात्रि 09:14 बजे तक।
अगस्त 2027
- 02 अगस्त 2027, सोमवार – श्रावण कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 01 अगस्त सायं 07:19 बजे से | तिथि समाप्त 02 अगस्त दोपहर 03:34 बजे तक।
- 16 अगस्त 2027, सोमवार – श्रावण शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 16 अगस्त प्रातः 10:28 बजे से | तिथि समाप्त 17 अगस्त दोपहर 12:58 बजे तक।
- 31 अगस्त 2027, मंगलवार – भाद्रपद कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 31 अगस्त प्रातः 02:40 बजे से | तिथि समाप्त 31 अगस्त रात्रि 11:10 बजे तक।
सितंबर 2027
- 15 सितंबर 2027, बुधवार – भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 15 सितंबर प्रातः 02:48 बजे से | तिथि समाप्त 16 सितंबर प्रातः 04:32 बजे तक।
- 30 सितंबर 2027, गुरुवार – आश्विन कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 29 सितंबर प्रातः 10:54 बजे से | तिथि समाप्त 30 सितंबर प्रातः 08:05 बजे तक।
अक्टूबर 2027
- 15 अक्टूबर 2027, शुक्रवार – आश्विन शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 14 अक्टूबर सायं 06:49 बजे से | तिथि समाप्त 15 अक्टूबर सायं 07:16 बजे तक।
- 29 अक्टूबर 2027, शुक्रवार – कार्तिक कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 28 अक्टूबर रात्रि 08:47 बजे से | तिथि समाप्त 29 अक्टूबर सायं 07:05 बजे तक।
नवंबर 2027
- 13 नवंबर 2027, शनिवार – कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 13 नवंबर प्रातः 09:55 बजे से | तिथि समाप्त 14 नवंबर प्रातः 08:55 बजे तक।
- 28 नवंबर 2027, रविवार – मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 27 नवंबर प्रातः 09:07 बजे से | तिथि समाप्त 28 नवंबर प्रातः 08:53 बजे तक।
दिसंबर 2027
- 13 दिसंबर 2027, सोमवार – मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा: तिथि प्रारंभ 12 दिसंबर रात्रि 11:54 बजे से | तिथि समाप्त 13 दिसंबर रात्रि 09:38 बजे तक।
- 27 दिसंबर 2027, सोमवार – पौष कृष्ण अमावस्या: तिथि प्रारंभ 27 दिसंबर रात्रि 12:22 बजे से | तिथि समाप्त 28 दिसंबर रात्रि 01:41 बजे तक।
पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि
- पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और पुष्प, फल, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें।
- दिनभर श्रद्धा के अनुसार उपवास रखें। अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार भी कर सकते हैं।
- संध्या के समय भगवान सत्यनारायण की पूजा एवं कथा का श्रवण करें।
- रात्रि में चंद्रमा के दर्शन होने पर जल, दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य अर्पित करें।
- भगवान विष्णु से परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगल की प्रार्थना करें और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र आदि का दान करें।
अमावस्या का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध, दान और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न, वस्त्र आदि का दान करना शुभ माना जाता है।
विशेषकर पितृ दोष से संबंधित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर पितरों का स्मरण, तर्पण और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- Q1. वर्ष 2027 में पूर्णिमा व्रत कब-कब हैं?
- उत्तर: वर्ष 2027 में कुल 12 पूर्णिमा पड़ेंगी। पहली पूर्णिमा 22 जनवरी 2027 को पौष शुक्ल पूर्णिमा और अंतिम पूर्णिमा 13 दिसंबर 2027 को मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा होगी। सभी पूर्णिमा की तिथियां ऊपर माहवार दी गई हैं।
- Q2. वर्ष 2027 में अमावस्या कब-कब है?
- उत्तर: वर्ष 2027 में कुल 13 अमावस्या पड़ेंगी। पहली अमावस्या 07 जनवरी 2027 को और अंतिम अमावस्या 27 दिसंबर 2027 को होगी। इन सभी की तिथियां और समय ऊपर दिए गए हैं।
- Q3. वर्ष 2027 में पहली और आखिरी पूर्णिमा कौन सी है?
- उत्तर: वर्ष 2027 की पहली पूर्णिमा 22 जनवरी को पौष शुक्ल पूर्णिमा और अंतिम पूर्णिमा 13 दिसंबर को मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा है।
- Q4. पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व क्या है?
- उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा का व्रत करने से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- Q5. वर्ष 2027 में अधिकमास की पूर्णिमा कब है?
- उत्तर: वर्ष 2027 में अधिकमास नहीं पड़ रहा है। इसलिए इस वर्ष अधिकमास या पुरुषोत्तम मास की कोई पूर्णिमा नहीं होगी।
- Q6. पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि क्या है?
- उत्तर: पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करें। संध्या के समय भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें।
- Q7. पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण व्रत क्यों किया जाता है?
- उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा सुनने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल बना रहता है। इस कारण पूर्णिमा तिथि पर सत्यनारायण व्रत विशेष रूप से प्रचलित है।
- Q8. चंद्र दोष के लिए पूर्णिमा के दिन क्या उपाय करना चाहिए?
- उत्तर: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिन व्यक्तियों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, उन्हें पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को जल अर्पित करना चाहिए। साथ ही भगवान शिव की पूजा और सफेद वस्तुओं का सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।
- Q9. क्या पूर्णिमा व्रत सभी लोग कर सकते हैं?
- उत्तर: हां, श्रद्धा और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार स्त्री-पुरुष सभी पूर्णिमा का व्रत कर सकते हैं। जो व्यक्ति उपवास नहीं कर सकते, वे केवल पूजा-पाठ, जप और दान करके भी इस दिन का धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
- Q10. पूर्णिमा व्रत और अमावस्या में क्या अंतर है?
- उत्तर: पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि होती है, जिसमें चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रकाशित होता है। अमावस्या कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है, जिसमें चंद्रमा दिखाई नहीं देता। पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, सत्यनारायण और चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है, जबकि अमावस्या पर पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य विशेष रूप से किए जाते हैं।
- Q11. क्या पूर्णिमा के दिन दान करना शुभ होता है?
- उत्तर: जी हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन अन्न, वस्त्र, चावल, दूध और अन्य जरूरत की वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। दान हमेशा अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार करना चाहिए।
- Q12. पूर्णिमा व्रत 2027 का सबसे श्रेष्ठ उपाय कौन सा है?
- उत्तर: पूर्णिमा के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करना, सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना, चंद्रमा को अर्घ्य देना तथा जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है। इन धार्मिक कार्यों को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए।
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