|| श्री गणेशाय नमः || 35+ वर्षों का अविश्वसनीय अनुभव 91 7470934089

रोग निवारण और सुख-समृद्धि के लिए सूर्य देव का व्रत: रविवार व्रत कथा

✍️ pt.rajguru@gmail.com  |  🕒 August 1, 2019  |  ⏱ 0 मिनट पढ़ें

पिछले लेख में हमने "व्रत उपवास से अनंत पुण्य और आरोग्य की प्राप्ति" इस बारे में संक्षेप में चर्चा की। इस लेख में हम प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य नारायण की रविवार व्रत कथा (ravivar vrat katha) और उसकी पूजा विधि के बारे में संक्षेप में चर्चा करेंगे।

रविवार को किया जाने वाला सूर्य व्रत रोगों के निवारण, आयु में वृद्धि, मनोकामनाओं की सिद्धि तथा सूर्य नारायण की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

रविवार व्रत की पूजन विधि एवं ध्यान

विधि: प्रातःकाल स्नान से निवृत्त होकर तांबे के पात्र में रक्त चन्दन (लाल चंदन) से अष्टदल कमल बनाएं और उस पर भगवान सूर्यदेव का विधिवत पूजन करें।

ध्यान: "हे सूर्य भगवान! आप आइये और इस मंडल पर तब तक स्थिर हो जाएं, जब तक मेरी पूजा संपन्न न हो जाए। अपनी दिव्य सन्निधि प्रदान करें।"

रविवार व्रत कथा (Ravivar Vrat Katha)

प्राचीन काल में एक नगर में एक धार्मिक वृद्धा रहती थी। वह प्रत्येक रविवार को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर अपने आंगन को गाय के गोबर से लीपकर स्वच्छ करती थी। उसके बाद सूर्य भगवान की पूजा-अर्चना कर भोजन तैयार करती और भगवान को भोग लगाकर ही स्वयं भोजन ग्रहण करती थी। भगवान सूर्यदेव की कृपा से उसे किसी प्रकार की चिंता व कष्ट नहीं था और उसका घर धन-धान्य से परिपूर्ण रहता था।

उस वृद्धा को निरंतर सुखी होते देख उसकी पड़ोसन उससे बुरी तरह जलने लगी। वृद्धा के पास स्वयं की कोई गाय नहीं थी, इसलिए वह रविवार के दिन आंगन लीपने के लिए पड़ोसन की गाय का गोबर लाती थी। ईर्ष्यावश पड़ोसन ने अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया। रविवार को गोबर न मिलने के कारण वृद्धा अपना आंगन नहीं लीप सकी। आंगन न लीप पाने से वृद्धा ने सूर्य भगवान को भोग नहीं लगाया और निराहार रही। सूर्यास्त होने पर वह भूखी-प्यासी ही सो गई।

भगवान सूर्यदेव ने दिए स्वप्न में दर्शन

वृद्धा के निष्काम और निराहार व्रत से प्रसन्न होकर रात्रि में भगवान सूर्यदेव ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और भोग न लगाने तथा भोजन न करने का कारण पूछा। वृद्धा ने अत्यंत करुण स्वर में पड़ोसन की चालाकी और गोबर न मिलने की बात कही।

सूर्य भगवान ने अपने भक्त की व्यथा जानकर कहा— "हे माते! हम तुम्हारी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हैं। हम तुम्हें एक ऐसी गाय प्रदान करते हैं जो तुम्हारी समस्त इच्छाएं पूर्ण करेगी। जो भी व्यक्ति रविवार का व्रत करता है और मेरी कथा सुनता है, उसके सर्व कष्ट दूर होते हैं; निर्धन को धन और बांझ स्त्रियों को उत्तम पुत्र की प्राप्ति होती है।" ऐसा वरदान देकर सूर्य देव अंतर्ध्यान हो गए।

सोने का गोबर और पड़ोसन की चालाकी

प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व जब वृद्धा की आंख खुली तो उसने अपने आंगन में एक अति सुंदर गाय और बछड़े को बंधा पाया। उसने प्रसन्न होकर गाय को चारा खिलाया। पड़ोसन ने जब वृद्धा के आंगन में सुंदर गाय देखी तो उसकी जलन और बढ़ गई। तभी गाय ने सोने का गोबर किया। सोने का गोबर देखते ही पड़ोसन की आंखें फटी रह गईं। उसने वृद्धा की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर चुपके से सोने का गोबर उठा लिया और अपनी गाय का साधारण गोबर वहां रख आई।

यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। वृद्धा को इस बात की खबर तक नहीं लगी और वह नियमपूर्वक हर रविवार सूर्यदेव का व्रत व कथा करती रही। जब सूर्य भगवान ने पड़ोसन की चालाकी देखी तो उन्होंने अपनी लीला से प्रचंड आंधी चलाई। आंधी के प्रकोप से बचने के लिए वृद्धा ने गाय को घर के भीतर बांध दिया।

राजा का दरबार और व्रत का चमत्कार

अगली सुबह जब वृद्धा ने घर के अंदर सोने का गोबर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। अब वह रोज गाय को घर के अंदर ही बांधने लगी और कुछ ही दिनों में अत्यंत धनी हो गई। पड़ोसन ने ईर्ष्या में आकर राजा के दरबार में गुहार लगाई और सोने का गोबर देने वाली गाय के बारे में बता दिया।

राजा ने तुरंत अपने सैनिकों को भेजकर वृद्धा की गाय छीन लाने का आदेश दिया। सैनिक जब गाय ले जाने लगे तो वृद्धा बहुत रोई-चिल्लाई, लेकिन सैनिकों ने एक न सुनी। दुखी होकर वृद्धा ने उस दिन भी कुछ नहीं खाया और रातभर सूर्य भगवान से गाय पुनः प्राप्त करने की प्रार्थना करती रही।

दूसरी ओर, राजा गाय पाकर बहुत प्रसन्न था, किंतु अगली सुबह जैसे ही वह उठा, उसने देखा कि पूरा राजमहल गोबर से भर गया है। उसी रात सूर्य देव ने राजा के स्वप्न में आकर कहा— "हे राजन! उस वृद्धा की गाय लौटाने में ही तुम्हारा कल्याण है। यह गाय मेरे रविवार व्रत के प्रभाव से उसे मिली है।"

सुबह होते ही राजा ने वृद्धा को आदर सहित महल बुलाकर क्षमा मांगी और धन-धान्य के साथ गाय लौटा दी। राजा ने दुष्ट पड़ोसन को कठोर दंड दिया। इसके बाद पूरा महल स्वतः स्वच्छ हो गया। राजा ने पूरे राज्य में घोषणा करवाई कि सभी प्रजाजन रविवार का व्रत रखा करें। रविवार व्रत के प्रभाव से पूरे राज्य में सुख-समृद्धि, आरोग्यता और खुशहाली छा गई।

रविवार व्रत कथा (Ravivar Vrat Katha) – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. रविवार व्रत कथा (ravivar vrat katha) क्या है?

उत्तर: रविवार व्रत कथा भगवान सूर्य नारायण को समर्पित एक धार्मिक कथा है, जिसे रविवार के दिन व्रत रखते समय सुना या पढ़ा जाता है। यह कथा भक्तों को रोगों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और सूर्य देव की कृपा दिलाती है।

2. रविवार व्रत करने के क्या लाभ हैं?

उत्तर: रविवार व्रत (ravivar vrat) करने से रोगों का नाश, आयु में वृद्धि, धन-धान्य की प्राप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। सूर्य भगवान की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

3. रविवार व्रत कथा कब और कैसे पढ़नी चाहिए?

उत्तर: रविवार व्रत कथा (ravivar vrat katha) सुबह स्नान के बाद, सूर्य भगवान की पूजा करके पढ़नी या सुननी चाहिए। पूजा के बाद ही भोजन करना चाहिए और पहले भगवान को भोग अवश्य लगाना चाहिए।

4. रविवार व्रत की विधि (ravivar vrat vidhi) क्या है?

उत्तर: रविवार व्रत की विधि में तांबे के पात्र में रक्त चंदन से अष्टदल कमल बनाकर सूर्य भगवान का पूजन किया जाता है। इसके बाद कथा सुनकर भगवान को भोग लगाया जाता है।

5. क्या रविवार व्रत कथा सुनना जरूरी है?

उत्तर: हाँ, रविवार व्रत कथा सुनना या पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। बिना कथा के व्रत अधूरा माना जाता है और पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

6. रविवार व्रत में क्या खाना चाहिए?

उत्तर: रविवार व्रत (ravivar vrat) में नमक रहित भोजन करना चाहिए। कई लोग एक समय भोजन करते हैं और पहले सूर्य भगवान को भोग लगाते हैं, उसके बाद ही स्वयं भोजन करते हैं।

7. रविवार व्रत कितने दिन करना चाहिए?

उत्तर: रविवार व्रत 7, 11 या 21 रविवार तक किया जा सकता है। कुछ लोग इसे निरंतर भी करते हैं, विशेषकर जब तक उनकी मनोकामना पूर्ण न हो जाए।

8. रविवार व्रत कथा सुनने से क्या फल मिलता है?

उत्तर: रविवार व्रत कथा (ravivar vrat katha) सुनने से निर्धन को धन, निसंतान को संतान, और रोगी को स्वास्थ्य लाभ मिलता है। जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

9. क्या महिलाएं और पुरुष दोनों रविवार व्रत कर सकते हैं?

उत्तर: हाँ, रविवार व्रत (ravivar vrat) स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं। यह व्रत सभी के लिए लाभकारी और फलदायी है।

10. रविवार व्रत में सूर्य भगवान को क्या अर्पित करें?

उत्तर: रविवार व्रत में सूर्य भगवान को जल, लाल फूल, गुड़, गेहूं और तांबे के पात्र से अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।

11. रविवार व्रत कथा का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: रविवार व्रत कथा का मुख्य संदेश है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख, धन और स्वास्थ्य मिलता है।

12. क्या रविवार व्रत से रोग दूर होते हैं?

उत्तर: हाँ, रविवार व्रत (ravivar vrat) विशेष रूप से रोग निवारण के लिए किया जाता है। सूर्य भगवान स्वास्थ्य के देवता माने जाते हैं, इसलिए उनके व्रत से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।

इन्हें भी देखें –

संबंधित लेख

बहुला चौथ की पूजा विधि, कथा और महत्व

पूरा पढ़ें

nag panchami – नांग पंचमी व्रत की विधि कथा एवं महत्त्व .

पूरा पढ़ें

hariyali teej – कैसे मनाई जाती है हरियाली तीज की सम्पूर्ण

पूरा पढ़ें

अपनी समीक्षा लिखें

ज्योतिषीय परामर्श केंद्र

विश्वसनीय समाधान • 35+ वर्षों का अनुभव


जीवन की कठिन समस्याओं, सटीक जन्मकुंडली विश्लेषण एवं वैदिक वास्तु के प्रामाणिक समाधान हेतु संपर्क करें।

शीघ्र संपर्क हेतु कॉल करें: +91 7470934089

व्हाट्सएप चैट: सीधे संवाद शुरू करें (Click to Chat)

हमारे मुख्य परामर्श केंद्र: जबलपुर एवं रायपुर (अपॉइंटमेंट द्वारा व्यक्तिगत भेंट संभव)

✦ आपकी गोपनीयता और समाधान हमारा परम संकल्प है ✦

Fill in your Details to Know your Kundli !