शास्त्रों के अनुसार, पाँच मुख वाला रुद्राक्ष (5 Mukhi Rudraksha) साक्षात कालाग्निस्वरुप है। यह रुद्राक्ष सब कुछ करने में समर्थ, सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति देने वाला तथा सम्पूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना गया है। पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य के समस्त अनजाने व जाने-अनजाने पाप नष्ट हो जाते हैं।
स्वास्थ्य लाभ एवं शारीरिक समस्याओं में प्रभाव
पंचमुखी रुद्राक्ष स्वास्थ्य दृष्टि से अत्यंत उपयोगी माना जाता है। जिन व्यक्तियों को निम्नलिखित स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं, उन्हें 5 मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए:
- लीवर (Liver) से संबंधित गंभीर परेशानियां एवं पाचन विकार।
- पीलिया (Jaundice) तथा शरीर में किसी प्रकार की सूजन।
- शरीर पर बड़े फोड़े, गाठें बनना, मस्से (Warts) एवं हाथीरोग।
- कानों से संबंधित परेशानियां व सुनने में समस्या।
उपरोक्त सभी शारीरिक समस्याओं में पंचमुखी रुद्राक्ष के प्रभाव से सकारात्मक परिणाम एवं समाधान प्राप्त होता है।
राशि एवं गुरु (बृहस्पति) ग्रह शांति
पाँच मुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से धनु तथा मीन राशि के जातकों को धारण करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जिन जातकों की कुंडली में गुरु (बृहस्पति) ग्रह कमज़ोर या पीड़ित हो, उनके लिए भी यह रुद्राक्ष अत्यंत फलदायी है। यह गुरु ग्रह से होने वाली सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान करने की पूर्ण क्षमता रखता है।
विशेष विकल्प: यदि आप किसी कारणवश रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहते हैं, तो आप गुरु ग्रह के दुष्प्रभावों से शांति हेतु सिद्ध गुरु यंत्र भी धारण या स्थापित कर सकते हैं।
सिद्ध करने का मंत्र एवं रक्षा प्रभाव
पाँच मुखी रुद्राक्ष को जागृत एवं सिद्ध करने का मूल वैदिक मंत्र निम्नलिखित है:
॥ ॐ ह्रीं नमः ॥
सुरक्षा एवं आध्यात्मिक प्रभाव: रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा अन्य द्रोहकारी नकारात्मक शक्तियां डरकर दूर भाग जाती हैं। इसके प्रभाव से कृत्रिम अभिचार कर्म (तंत्र-मंत्र) निष्फल हो जाते हैं, तथा जिन पर अभिचार कर्म किया गया हो, वे रुद्राक्ष धारण करते ही उन दुष्ट प्रभावों से सर्वथा मुक्त हो जाते हैं।