शास्त्रों में नौ मुख वाले रुद्राक्ष (9 Mukhi Rudraksha) को भैरव तथा कपिल मुनि का प्रतीक माना गया है। इसके अतिरिक्त, नौ रूप धारण करने वाली माहेश्वरी मां दुर्गा इसकी मुख्य अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। जो मनुष्य भक्ति-परायण होकर अपने बाएं हाथ में नवमुखी रुद्राक्ष को धारण करता है, वह निश्चय ही असाधारण और प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी बन जाता है—इसमें तनिक भी संशय नहीं है।
स्वास्थ्य लाभ एवं समस्या निवारण
नवमुखी रुद्राक्ष शारीरिक और मानसिक रोगों के निवारण के लिए अत्यंत कारगर सिद्ध होता है। यदि आप निम्नलिखित समस्याओं से पीड़ित हैं, तो यह रुद्राक्ष आपके लिए विशेष फलदायी है:
- सफेद दाग, कुष्ठ रोग तथा अन्य प्रकार की गंभीर त्वचा संबंधी बीमारियां।
- मन का सदा उदास रहना, मानसिक अवसाद (Depression) या चिंता।
- निम्न श्रेणी के व्यक्तियों से निरंतर बाधा या पीड़ा प्राप्त होना।
- बुद्धि का सही समय पर काम न करना तथा निर्णय लेने में दुविधा होना।
केतु ग्रह शांति एवं आध्यात्मिक प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 9 मुखी रुद्राक्ष केतु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। जिन जातकों की कुंडली में केतु अशुभ प्रभाव दे रहा हो या केतु की महादशा/अंतरदशा चल रही हो, उनके लिए यह रुद्राक्ष धारण करना अनिवार्य माना गया है। इसे धारण करने से केतु ग्रह से संबंधित सभी परेशानियों और दोषों का पूर्ण शमन होता है।
सिद्ध करने का मंत्र एवं रक्षा प्रभाव
नौ मुखी रुद्राक्ष को जागृत एवं सिद्ध करने का मूल मंत्र निम्नलिखित है:
॥ ॐ ह्रीं हुं नमः ॥
सुरक्षा प्रभाव: रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी तथा अन्य द्रोहकारी नकारात्मक शक्तियां डरकर भाग जाती हैं। इसके प्रभाव से कृत्रिम अभिचार (तंत्र-मंत्र) निष्फल हो जाते हैं, तथा जिन पर अभिचार कर्म किया गया हो, वे रुद्राक्ष धारण करते ही उन दुष्ट प्रभावों से मुक्त हो जाते हैं।
विशेष सूचना: यदि आप किसी कारणवश रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहते हैं, तो आप केतु ग्रह के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए सिद्ध केतु यंत्र भी धारण कर सकते हैं।