Sankashti Chaturthi 2027: संकष्टी एवं विनायक चतुर्थी की तिथियां, चंद्रोदय समय, शुभ मुहूर्त और व्रत विधि
Sankashti Chaturthi 2027: हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता, बुद्धि, विवेक, रिद्धि और सिद्धि का दाता माना जाता है। भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रत्येक माह संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी के व्रत किए जाते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास में दो पक्ष होते हैं। पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष। प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, जबकि अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।
संकष्टी का अर्थ है संकटों से मुक्ति। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन के कष्टों और बाधाओं से मुक्ति पाने में भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत में दिनभर उपवास रखने के बाद चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और भगवान गणेश की पूजा करके व्रत का पारण किया जाता है.
विनायक चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की आराधना के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा, मंत्र जाप और व्रत करने से बुद्धि, विवेक तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति की कामना की जाती है।
संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी दोनों ही भगवान गणेश को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत हैं। हालांकि दोनों की पूजा विधि और व्रत पारण की परंपरा में अंतर होता है:
- संकष्टी चतुर्थी का महत्व: संकष्टी चतुर्थी का व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस दिन व्रती सुबह स्नान करके भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेते हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद रात्रि में चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा और व्रत कथा सुनकर व्रत का पारण किया जाता है।
- विनायक चतुर्थी का महत्व: विनायक चतुर्थी प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष रूप से की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से बुद्धि, विवेक, कार्यों में सफलता तथा जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा का विशेष समय मध्याह्न काल माना जाता है।
- गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है। इस दिन घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करके विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
संकष्टी एवं विनायक चतुर्थी 2027 की मासिक सूची
वर्ष 2027 में प्रत्येक माह संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी के व्रत आएंगे। नीचे जनवरी से दिसंबर तक दोनों व्रतों की तिथियां, तिथि प्रारंभ एवं समाप्ति का समय तथा संकष्टी चतुर्थी के लिए जबलपुर (मध्य प्रदेश) का चंद्रोदय समय दिया गया है:
जनवरी 2027
- 11 जनवरी 2027, सोमवार – विनायक चतुर्थी / विघ्नेश्वर चतुर्थी (पौष शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 11 जनवरी प्रातः 09:28 बजे से | तिथि समाप्त 12 जनवरी प्रातः 11:29 बजे तक।
- 25 जनवरी 2027, सोमवार – लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी / सकट चौथ (माघ कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 25 जनवरी प्रातः 08:10 बजे से | तिथि समाप्त 26 जनवरी प्रातः 06:00 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 09:16 बजे।
फरवरी 2027
- 10 फरवरी 2027, बुधवार – विनायक चतुर्थी / गणेश जयंती (माघ शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 10 फरवरी रात्रि 02:19 बजे से | तिथि समाप्त 11 फरवरी प्रातः 03:04 बजे तक।
- 24 फरवरी 2027, बुधवार – द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 23 फरवरी रात्रि 09:48 बजे से | तिथि समाप्त 24 फरवरी रात्रि 08:39 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 10:03 बजे।
मार्च 2027
- 12 मार्च 2027, शुक्रवार – विनायक चतुर्थी / ढुण्ढिराज चतुर्थी (फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 11 मार्च दोपहर 03:37 बजे से | तिथि समाप्त 12 मार्च दोपहर 02:57 बजे तक।
- 25 मार्च 2027, गुरुवार – भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी (चैत्र कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 25 मार्च दोपहर 12:37 बजे से | तिथि समाप्त 26 मार्च दोपहर 12:43 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 09:49 बजे।
अप्रैल 2027
- 10 अप्रैल 2027, शनिवार – विनायक चतुर्थी / वासुदेव चतुर्थी (चैत्र शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 10 अप्रैल रात्रि 01:31 बजे से | तिथि समाप्त 10 अप्रैल रात्रि 11:39 बजे तक।
- 24 अप्रैल 2027, शनिवार – विकट संकष्टी चतुर्थी (वैशाख कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 24 अप्रैल प्रातः 04:20 बजे से | तिथि समाप्त 25 अप्रैल प्रातः 05:41 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 10:32 बजे।
मई 2027
- 09 मई 2027, रविवार – विनायक चतुर्थी / संकर्षण चतुर्थी (वैशाख शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 09 मई प्रातः 09:03 बजे से | तिथि समाप्त 10 मई प्रातः 06:22 बजे तक।
- 23 मई 2027, रविवार – एकदन्त संकष्टी चतुर्थी (ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 23 मई रात्रि 08:41 बजे से | तिथि समाप्त 24 मई रात्रि 10:58 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 10:03 बजे।
जून 2027
- 08 जून 2027, मंगलवार – विनायक चतुर्थी / प्रद्युम्न चतुर्थी (ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 07 जून दोपहर 03:25 बजे से | तिथि समाप्त 08 जून दोपहर 12:21 बजे तक।
- 22 जून 2027, मंगलवार – कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी (आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 22 जून दोपहर 01:07 बजे से | तिथि समाप्त 23 जून दोपहर 03:42 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 09:57 बजे।
जुलाई 2027
- 07 जुलाई 2027, बुधवार – विनायक चतुर्थी / अनिरुद्ध चतुर्थी (आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 06 जुलाई रात्रि 09:48 बजे से | तिथि समाप्त 07 जुलाई सायं 06:43 बजे तक।
- 22 जुलाई 2027, गुरुवार – गजानन संकष्टी चतुर्थी (श्रावण कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 22 जुलाई प्रातः 04:46 बजे से | तिथि समाप्त 23 जुलाई प्रातः 06:56 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 09:27 बजे।
अगस्त 2027
- 05 अगस्त 2027, गुरुवार – विनायक चतुर्थी / दूर्वा गणपति चतुर्थी (श्रावण शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 05 अगस्त प्रातः 05:08 बजे से | तिथि समाप्त 06 अगस्त रात्रि 02:27 बजे तक।
- 20 अगस्त 2027, शुक्रवार – हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी / बहुला चतुर्थी (भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 20 अगस्त सायं 06:53 बजे से | तिथि समाप्त 21 अगस्त रात्रि 08:04 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 08:57 बजे के लगभग।
सितंबर 2027
- 04 सितंबर 2027, शनिवार – विनायक चतुर्थी / सिद्धिविनायक चतुर्थी / गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 03 सितंबर दोपहर 02:18 बजे से | तिथि समाप्त 04 सितंबर दोपहर 12:25 बजे तक।
- 19 सितंबर 2027, रविवार – विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी (आश्विन कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 19 सितंबर प्रातः 07:08 बजे से | तिथि समाप्त 20 सितंबर प्रातः 07:08 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 08:08 बजे।
अक्टूबर 2027
- 03 अक्टूबर 2027, रविवार – विनायक चतुर्थी / कपर्दिश चतुर्थी (आश्विन शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 03 अक्टूबर रात्रि 02:08 बजे से | तिथि समाप्त 04 अक्टूबर रात्रि 01:28 बजे तक।
- 18 अक्टूबर 2027, सोमवार – करवा चौथ / संकष्टी चतुर्थी (कार्तिक कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 18 अक्टूबर सायं 05:51 बजे से | तिथि समाप्त 19 अक्टूबर सायं 04:42 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: सायं 07:35 बजे।
नवंबर 2027
- 02 नवंबर 2027, मंगलवार – विनायक चतुर्थी / लाभ चतुर्थी (कार्तिक शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 01 नवंबर सायं 05:15 बजे से | तिथि समाप्त 02 नवंबर सायं 06:01 बजे तक।
- 17 नवंबर 2027, बुधवार – गणाधिप संकष्टी चतुर्थी (मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 17 नवंबर प्रातः 03:41 बजे से | तिथि समाप्त 18 नवंबर रात्रि 01:35 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 08:26 बजे।
दिसंबर 2027
- 02 दिसंबर 2027, गुरुवार – विनायक चतुर्थी / कृच्छ्र चतुर्थी (मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 01 दिसंबर प्रातः 11:39 बजे से | तिथि समाप्त 02 दिसंबर दोपहर 01:43 बजे तक।
- 16 दिसंबर 2027, गुरुवार – अखुरथ संकष्टी चतुर्थी (पौष कृष्ण चतुर्थी): तिथि प्रारंभ 16 दिसंबर दोपहर 01:21 बजे से | तिथि समाप्त 17 दिसंबर प्रातः 10:34 बजे तक।
जबलपुर (मध्य प्रदेश) में चंद्रोदय समय: रात्रि 08:30 बजे।
संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि
- संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके उन्हें लाल या पीले पुष्प, दूर्वा, अक्षत, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।
- भगवान गणेश को मोदक, लड्डू या अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और नैवेद्य अर्पित करें।
- दिनभर उपवास रखें। अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं।
- संध्या के समय भगवान गणेश की पूजा करें और संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा सुनें।
- चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा और आरती करें।
- भगवान गणेश को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें और व्रत का पारण करें।
विनायक चतुर्थी व्रत की पूजा विधि
विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा मध्याह्न काल में करना विशेष शुभ माना जाता है:
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को दूर्वा, लाल पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
- मोदक, लड्डू और फल का भोग लगाएं।
- भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें और विनायक चतुर्थी की कथा सुनें।
- गणेश जी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
- व्रत का पारण अपनी परंपरा और पूजा विधि के अनुसार करें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाना चाहिए?
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार उपवास रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन निर्जल व्रत करते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं।
फलाहार में फल, दूध, मखाना, साबूदाना, मूंगफली और सेंधा नमक से बने व्यंजन ग्रहण किए जा सकते हैं। व्रत में अनाज और सामान्य नमक का सेवन अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार वर्जित रखा जाता है। चंद्रोदय के बाद भगवान गणेश की पूजा और अर्घ्य देने के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है।
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। धार्मिक परंपरा के अनुसार चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को जल अर्पित किया जाता है और भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है।
इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद भगवान गणेश की पूजा, आरती और व्रत कथा का श्रवण करके व्रत का पारण किया जाता है। चंद्रमा का उदय प्रत्येक शहर में अलग-अलग समय पर होता है। इसलिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को अपने शहर के चंद्रोदय समय के अनुसार पूजा करनी चाहिए।
संकष्टी चतुर्थी 2027 का निष्कर्ष
संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत हैं। वर्ष 2027 में जनवरी से दिसंबर तक प्रत्येक माह इन दोनों व्रतों की तिथियां आएंगी। संकष्टी चतुर्थी के दिन उपवास, गणेश पूजन, व्रत कथा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है, जबकि विनायक चतुर्थी पर मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक इन व्रतों को करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन की बाधाओं को दूर करने, बुद्धि-विवेक और सुख-समृद्धि की प्राप्ति की कामना की जाती है। भगवान श्री गणेश सभी भक्तों के जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर करें और उन्हें रिद्धि-सिद्धि एवं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – Sankashti Chaturthi 2027 FAQ (सभी 20 प्रश्न)
- Q1. संकष्टी चतुर्थी 2027 कब-कब है?
- उत्तर: वर्ष 2027 में संकष्टी चतुर्थी की 12 तिथियां पड़ेंगी। पहली संकष्टी चतुर्थी 25 जनवरी 2027 को लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी और अंतिम संकष्टी चतुर्थी 16 दिसंबर 2027 को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी होगी। सभी तिथियां और चंद्रोदय समय इस लेख में दिए गए हैं।
- Q2. विनायक चतुर्थी 2027 कब-कब है?
- उत्तर: वर्ष 2027 में प्रत्येक माह एक विनायक चतुर्थी आएगी। पहली विनायक चतुर्थी 11 जनवरी और अंतिम विनायक चतुर्थी 02 दिसंबर 2027 को होगी।
- Q3. संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?
- उत्तर: संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, जबकि विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आती है। संकष्टी चतुर्थी में चंद्रोदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है, जबकि विनायक चतुर्थी में मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।
- Q4. संकष्टी चतुर्थी 2027 में पहली तिथि कौन-सी है?
- उत्तर: वर्ष 2027 की पहली संकष्टी चतुर्थी 25 जनवरी, सोमवार को लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाई जाएगी। इसी दिन सकट चौथ का व्रत भी है।
- Q5. संकष्टी चतुर्थी 2027 में चंद्रोदय समय कैसे पता करें?
- उत्तर: चंद्रोदय का समय प्रत्येक शहर के अनुसार अलग-अलग होता है। इस लेख में जबलपुर (मध्य प्रदेश) का चंद्रोदय समय दिया गया है। अन्य शहरों के श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रोदय समय देखना चाहिए।
- Q6. संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे करें?
- उत्तर: प्रातः स्नान करके भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर उपवास रखें। संध्या के समय भगवान गणेश की पूजा और कथा करें। चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें और भगवान गणेश की आरती करके व्रत का पारण करें।
- Q7. संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाना चाहिए?
- उत्तर: व्रत में फल, दूध, मखाना, साबूदाना, मूंगफली और सेंधा नमक से बने फलाहारी व्यंजन ग्रहण किए जा सकते हैं। व्रत में भोजन संबंधी नियम अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार रखने चाहिए।
- Q8. वर्ष 2027 में सबसे महत्वपूर्ण संकष्टी चतुर्थी कौन-सी हैं?
- उत्तर: वर्ष 2027 में सकट चौथ (25 जनवरी), बहुला अथवा हेरम्ब संकष्टी (अगस्त), करवा चौथ (18 अक्टूबर) और अखुरथ संकष्टी (16 दिसंबर) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इनकी धार्मिक एवं क्षेत्रीय परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं।
- Q9. संकष्टी चतुर्थी और करवा चौथ में क्या संबंध है?
- उत्तर: करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह संकष्टी चतुर्थी के दिन ही पड़ती है। हालांकि करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से विशेष विधि के अनुसार किया जाता है। इसमें चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
- Q10. क्या संकष्टी चतुर्थी का व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते हैं?
- उत्तर: जी हां, संकष्टी चतुर्थी का व्रत स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं। श्रद्धा और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार उपवास रखकर भगवान गणेश की पूजा की जा सकती है।
- Q11. संकष्टी चतुर्थी 2027 पर कौन-सा मंत्र जपना चाहिए?
- उत्तर: संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
- Q12. संकष्टी चतुर्थी की तिथि कैसे निर्धारित होती है?
- उत्तर: पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। व्रत की तिथि निर्धारित करते समय चतुर्थी तिथि के साथ चंद्रोदय का भी विशेष विचार किया जाता है।
- Q13. संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा दिखाई न दे तो व्रत कैसे खोलें?
- उत्तर: यदि बादलों या मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय समय के अनुसार चंद्रमा को मानसिक रूप से प्रणाम करके और निर्धारित पूजा-विधि का पालन करके व्रत का पारण किया जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा का भी ध्यान रखें।
- Q14. क्या संकष्टी चतुर्थी पर गणेश कथा सुनना आवश्यक है?
- उत्तर: संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की व्रत कथा सुनने या पढ़ने की विशेष परंपरा है। श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण करके भगवान गणेश की आराधना करनी चाहिए।
- Q15. विनायक चतुर्थी की पूजा किस समय करनी चाहिए?
- उत्तर: विनायक चतुर्थी पर मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है। पूजा के लिए उस दिन का स्थानीय पंचांग देखकर मध्याह्न पूजा मुहूर्त निर्धारित करना चाहिए।
- Q16. गणेश चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?
- उत्तर: विनायक चतुर्थी प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आती है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है।
- Q17. संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोलना चाहिए?
- उत्तर: संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने, भगवान गणेश की पूजा और आरती करने के पश्चात खोला जाता है।
- Q18. क्या संकष्टी चतुर्थी पर निर्जल व्रत रखना जरूरी है?
- उत्तर: नहीं। निर्जल व्रत रखना सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या अन्य अनुमत आहार लेकर भी व्रत कर सकते हैं।
- Q19. सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है?
- उत्तर: सकट चौथ माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। यह संकष्टी चतुर्थी का ही एक विशेष रूप है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना से व्रत करती हैं।
- Q20. Sankashti Chaturthi 2027 की पूरी सूची कहां देखें?
- उत्तर: संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी 2027 की सभी तिथियां, तिथि प्रारंभ एवं समाप्ति का समय तथा जबलपुर का चंद्रोदय समय इसी लेख में जनवरी से दिसंबर तक महीनेवार दिया गया है।
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