Panchak 2022
पंचक दिनांक 2022 जनवरी से दिसंबर तक Panchak 2022 – हमारा भारत देश धर्म प्रधान देश है | हमारे देश में हर कार्य धर्म- अधर्म का विचार करते हुए किया […]
पंचक दिनांक 2022 जनवरी से दिसंबर तक Panchak 2022 – हमारा भारत देश धर्म प्रधान देश है | हमारे देश में हर कार्य धर्म- अधर्म का विचार करते हुए किया […]
वर्ष 2022 के सभी शुभ मुहूर्त Shubh Muhurat 2022 – जब हम किसी भी कार्य को आरम्भ करते हैं उस समय दिन. तिथि, लग्न, ग्रहों की स्थिति आदि हमारे
शुक्र की महादशा का फल Shukra Mahadasha Fal – शुक्र महादशा का साधारण फल – शुक्र की महादशा में जातक को स्त्री, संतान, धन, समृद्धि और आभूषण वस्त्र आदि
केतु की महादशा का फल Ketu Mahadasha ka Fal – केतु वैदिक ज्योतिष का एक छाया ग्रह है। यह मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, विपरीत परिस्थितियों और कर्मफल का द्योतक है। इसकी
भिन्न-भिन्न भाव एवं राशि में स्थित बुध की महादशा का फल Budh Mahadasha ka fal – केंद्र में स्थित बुध की महादशा में राजाओं से मित्रता, धन-धान्य, स्त्री और पुत्र
बुध की महादशा का फल Budh Mahadasha Fal – बुध की महादशा का साधारण फल – बुध की महादशा में अपने से उम्र में एवं धन में बड़े मनुष्यों से,
भानुसार शनि की महादशा का फल shani mahadasha ka fal – अलग-अलग भावों में स्थित शनि अपनी महादशा में क्या फल देता है | लग्न में स्थित शनि की महादशा
क्या शनि की महादशा से डर लगता है? क्या यह सिर्फ दुर्भाग्य ही लाती है? Shani Mahadasha effects – अगर आपकी कुंडली में शनि की महादशा चल रही है, तो
भावानुसार एवं राशि अनुसार गुरु की महादशा का फल Guru mahadasha ka fal – इस लेख में जानेंगे गुरु अलग-अलग भागों में स्थित होकर अपनी दशा में जातक को क्या
गुरु की महादशा का फल: जानें आपके जीवन पर क्या होगा प्रभाव? Guru Mahadasha fal – क्या आप जानते हैं कि आपकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति आपके जीवन
अलग-अलग भाव में स्थित राहू की महादशा का फल Rahu Mahadasha ka fal – भिन्न-भिन्न भावों में स्थित राहु की दशा का फल – पहले, दुसरे, तीसरे भाव में स्थित
राहू की महादशा का फल Rahu Mahadasha fal – राहू को हमारे ज्योतिष शास्त्र में कोई स्थान प्राप्त नहीं है | न तो राहू की अपनी कोई राशि होती और
भिन्न-भिन्न भाव में स्थित मंगल की महादशा का फल Mangal Mahadasha ka fal – भिन्न-भिन्न भावगत मंगल के रहने से वह अपनी दशा में क्या फल देता है इस लेख
मंगल की महादशा: पराक्रम, संघर्ष और अवसरों का संगम Mangal Mahadasha Fal – ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, पराक्रम, युद्ध, भूमि, साहस और आत्मबल का प्रतीक माना गया
अलग-अलग भाव ने स्थित चन्द्र महादशा का फल Chandra Mahadasha ka fal – पहले, दुसरे, तीसरे भाव में स्थित चंद्रमा की दशा का फल – पथम भाव में स्थित चन्द्रमा
चन्द्र की महादशा का फल – जीवन में सुख, संघर्ष और मानसिक स्थिति पर प्रभाव Chandra Mahadasha fal – चन्द्रमा मन, भावना, माता, परिवार और सुख-सुविधाओं का कारक माना गया
पूर्णिमा व्रत कैसे करें – विधि, लाभ, महत्व और खानपान सहित संपूर्ण जानकारी Purnima Vrat ki Vidhi – पूर्णिमा का व्रत शास्त्रों में अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। चंद्रमा की
भावानुसार सूर्य दशा फल bhavanusar surya mahadasha fal – अलग-अलग भाव में स्थित सूर्य अपनी महादशा में क्या फल देता है इस बारे में जानते हैं | सूर्य यदि लग्न
सूर्य की महादशा का फल Surya Mahadasha fal – वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है | सूर्य आत्मा का कारक होता है और मस्तिष्क
ग्रहों की महादशा फल विधि Mahadasha fal – महादशा फल के साधारण नियम जिस ग्रह की महादशा चल रही है और जन्म कुंडली में वह ग्रह बली हो तो वह
श्री सूक्त पाठ की सही विधि एवं फायदे sri suktam benefits – धन वृद्धि के उपाय में सर्वप्रथम यदि कोई उपाय में सबसे पहले आता है तो वह है श्रीसूक्त
आर्थिक समृद्धि के सरल एवं सटीक उपाय lakshmi prapti ke upay – आज आर्थिक समृद्धि प्रत्येक व्यक्ति की सबसे पहली इच्छा होती है | और सही भी है क्योंकि धन
मंगल दोष के लिए सरल और शक्तिशाली उपाय: जानें क्या करें mangal ke upay – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार सूर्य को राजा कहा गया है उसी प्रकार मंगल
चंद्रमा के मंत्र और उपाय: पाएं मानसिक शांति और सफलता Chandra ke upay – हमारे ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को काल पुरुष का मन कहा गया है | “चंद्रमा मनसो जायत” मन्त्र
ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व, स्वभाव, स्वास्थ्य पर प्रभाव और उपाय Jyotish me Budh grah – ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों का विशेष स्थान है और प्रत्येक ग्रह जीवन
मंगल ग्रह और ज्योतिष Jyotish me mangal grah – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार सूर्य को राजा कहा गया है उसी प्रकार मंगल को मंत्रीं की पदवी प्राप्त है
27 नक्षत्रों के मंत्र जप संख्या एवं माला 27 nakshatra ke mantra – वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का विशेष महत्व है। ये नक्षत्र न केवल हमारे व्यक्तित्व और भविष्य
नक्षत्रों का चरण अनुसार फल 27 nakshatra faladesh – जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र के जिस चरण में होता है वही जातक का जन्म नक्षत्र चरण माना जाता है
नक्षत्र और उनकी विशेषताएं Nakshatra – कृष्णमूर्ति पद्धति में नक्षत्रों का विशेष महत्व बताया है | इस पद्धति में प्रश्न कुंडली हो या जन्म कुंडली फलादेश करते समय नक्षत्रों का
ग्रहों की रश्मि द्वारा फल Rashmi fal in astrology – रश्मि अर्थात ग्रह की किरण जो गणित द्वारा प्राप्त की जाती है | जिस ग्रह की सबसे ज्यादा रश्मि होती
शास्त्रों एवं ज्मेंयोतिष में चन्द्रमा का महत्व jyotish me chandrama – हमारे शास्त्रों में चंद्रमा का विशेष महत्व माना गया है | चंद्रमा का एक नाम सोम भी है |
ज्योतिष एवं शास्त्रों में सूर्य का महत्व Jyotish me Surya Graha – सूर्य को हमारे वेद शास्त्रों में जगत की आत्मा मन गया है | सूर्य से ही इस पृथ्वी
याददास्त और ज्योतिष: कुंडली से कैसे समझें स्मरण शक्ति की ताकत और कमजोरी Memory and astrology – हर व्यक्ति की याददाश्त एक जैसी नहीं होती। कोई आसानी से सब कुछ
क्या आपकी कुंडली में उच्च शिक्षा योग है Education and astrology – मित्रों इस लेख में जानेंगे जातक की विद्या, कला-कौशल इत्यादि के बारे में यह सर्वविदित है कि विद्या
महापद्म काल सर्प योग का निर्माण mahapadma kaal sarp yog – इस महापद्म काल सर्पयोग नामक योग का निर्माण छटवें भाव से बारहवे भाव तक ग्रहों की स्थिति के कारण
कैसे बनता है पद्म काल सर्प योग padam kaal sarp yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बनने वाले योगों में काल सर्प योग भी आता है | यह
शंखपाल काल सर्प योग क्या होता है shankhpal kaal sarp yog – चतुर्थ भाव में राहू और दशवें भाव में केतु के आ जाने पर और चतुर्थ भाव और दशवें
वासुकी काल सर्प योग के प्रभाव vasuki kaal sarp yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म पत्रिका के तीसरे भाव में राहू और नवम भाव में केतु के स्थित होने
कैसे बनता है कुलिक काल सर्प योग Kulik Kaal Sarp Yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दुसरे भाव में राहू और आठवें भाव में केतु के होने पर तथा इनके
कैसे बनता है अनंत कालसर्प योग Anant Kaal Sarp Yog – अनंत कालसर्प योग प्रथम भाव से सप्तम भाव के मध्य बनता है | जब राहू प्रथम भाव में और
कैसे बनता है काल सर्प योग Kaal Sarp Yog – जब कुंडली में ग्रहों का एक विशेष स्थिति में उदय होता है, या इसे एसा भी कह सकते हैं कि
नवग्रह स्त्रोत पाठ एवं विधि navagraha stotram, इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी वर्गों के मनुष्यों को नवग्रह स्त्रोत का पाठ करना चाहिए | जिन व्यक्तियों को अपनी जन्म
संकट मोचन हनुमान अष्टक पाठ sankat mochan hanuman ashtak, श्री पवन पुत्र हनुमान जी का नाम ही संकटमोचन है | त्रेता से द्वापर तक जब भी देवताओं पर कष्ट पड़ा
संकट नाशक गणेश स्त्रोत के लाभ sankat nashan ganesh stotram, श्री गणेशजी वेद शास्त्रों में प्रथम पूज्य माने जाते हैं | प्रायः सभी शास्त्रों में प्रथम बन्दना गणेशजी की होती
अधि योग क्या है ? (Adhi yoga) – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह भावों में स्थित ग्रह कोई न कोई योग का निर्माण करते हैं | जिनमे से
कैसे बनता है अखण्ड साम्राज्य योग (Akhand samrajya yoga)अखंड साम्राज्य योग वो योग है जो कुंडली में होने पर आपकी सूरत बदल देता है। अखंड साम्राज्य योग होने पर अन्य
रुचक योग की सही जानकारी (Ruchaka yoga) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह भावों में स्थित ग्रह कोई न कोई योग का निर्माण करते हैं | जिनमे से कुछ
माँ का सुख देने वाले योग- (matr sukh aur jyotish) – इस लेख में माताजी के सुख के बारे में विचार करेंगे कि जातक को माताजी का सुख प्राप्त होगा
कुंडली में अरिष्ट भंग योग (arishta bhanga yoga) – मित्रों पिछले लेख में अर्थात बालारिष्ट योग मैं जाना की ऐसे कौन से योग कुंडली में होते हैं जिससे अल्पायु अर्थात
कुण्डली में अल्पायु योग- (balarishta yoga in kundali) – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की आयु को तीन भागों में विभक्त किया गया है | प्रथम बालारिष्ट या अल्पायु, द्वितीय
कुण्डली में 5 ग्रहों की युति का फल- ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि ग्रह अकेले नहीं बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर जातक
4 Graho Ki Yuti का फल ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति मात्र संयोग नहीं होती, बल्कि यह हमारे कर्म, संस्कार, भविष्य और व्यक्तित्व की सूक्ष्म रूप से
कुण्डली में 3 ग्रहों की युति का फल सूर्य, चन्द्र, मंगल युति का फल-(3 graho ki yuti) 3 graho ki yuti – कुण्डली में सूर्य, चंद्र और मंगल एक
कुण्डली में दो ग्रहों की युति का फल- सूर्य और चंद्र युति का फल- (do graho ki yuti) (do graho ki yuti) – यदि सूर्य और चंद्र एक ही स्थान
प्रथम भाव पर राहु की पूर्ण दृष्टि का फल- (Rahu drishti ka fal) – लग्न भाव को राहु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक रोगी होते हैं | इन्हें
प्रथम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल- (shani drishti ka fal) – लग्न भाव को शनि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति देखने में कुछ सांवले
प्रथम भाव पर शुक्र की पूर्ण दृष्टि का फल- (shukra drishti ka fal) – शुक्र प्रथम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक देखने में सुंदर और
गुरु दृष्टि का फल guru drishti ka fal – हमारे ज्योतिष शास्त्र में गुरु की तीन दृष्टि बतायीं गयीं हैं | जिन्हें पूर्ण दृष्टि मानी जाती है | 1- पंचम
प्रथम भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल- (budh drishti ka fal) – बुध जब लग्न भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे व्यक्ति गणितज्ञ अर्थात गणित
प्रथम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल- (mangal drishti ka fal) – प्रथम भाव को मंगल पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक उग्र प्रकृति के
प्रथम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल- (Chandra Drishti ka fal) – जब चंद्रमा प्रथम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे जातक अधिकतर प्रवासी ही
बारहवें भाव में स्थित चंद्रमा का फल- (moon in 12th house) – बारहवें भाव में अपने मित्र गुरु की राशि में स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक, शुभ कार्यों में
एकादश भाव में चन्द्रमा का फल- (moon in 11th house) – ग्यारहवें भाव में अपने शत्रु शनि की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक दृढसंकल्पित होते हैं अर्थात
प्रथम भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल- (Surya drishti ka fal)-सूर्य यदि प्रथम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक रजोगुण प्रधान होते हैं |
unch neech grah fal जन्म के समय ग्रह आकाश में जहां स्थित होते हैं | वैसे ही कुण्डली में स्थित किये जाते हैं | जो ग्रह जिस राशि में होता
ग्रहों का बल कैसे जाने – Bali Graha in Kundali – आज के इस लेख में हम ग्रहों के बलों पर विचार करेंगे ग्रहों के बल कितने प्रकार के होते
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से राहु-केतु का गोचर – (rahu ketu gochar fal) राहु और केतु छाया ग्रह है अन्य ग्रहों की भांति इनका भौतिक अस्तित्व नहीं है | संभवत
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से शनि का गोचर – (shani gochar fal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से शुक्र का गोचर – (shukra gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से गुरु का गोचर – (guru gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से बुध का गोचर – (budh gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से मंगल का गोचर – (mangal gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से चंद्र का गोचर – (Chandra gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों के ऊपर से गोचर विचार – (Surya gochar ka jatak par prabhav) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ
केतु गोचर फल – Ketu Transit Ketu Transit – (ketu gochar) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से
(rahu gochar) Rahu Transit-राहु गोचर फल – ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश
शनि गोचर फल – (Saturn transit) (Saturn transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में
शुक्र गोचर का फल – (Venus transit) (Venus transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि
गुरु गोचर फल – (Jupiter transit) (Jupiter transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में
बुध गोचर का फल – (Mercury transit) (Mercury transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि
(mangal gochar) मंगल गोचर फल – (Mars transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में
चन्द्र के गोचर का जातक पर प्रभाव (moon transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि
अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका free janam kundali analysis part 1 – कुण्डली कैसे देखें भाग दो में आपका स्वागत है | भाग एक में ज्योतिष का परिचय
अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका हमारे इस (free janam kundali analysis part 1) कुण्डली कैसे देखें कार्यक्रम में आपको गणित नहीं पढ़ना है | इसमे सिर्फ आपको अपनी
क्या है सुनफा योग आज हम sunapha yoga के बारे में जानेंगे, ज्योतिष में यदि हम योगों की बात करें, तो नों ग्रह और बारह राशियाँ विद्यमान हैं | किसी
क्या है गजकेशरी योग कैसे बनता है गजकेशरी योग – (gaja kesari yoga), सही गजकेशरी योग क्या है और इसके क्या फल होते हैं गजकेशरी योग से जुडी हुई कुछ
ज्योतिष शास्त्र: एक प्राचीन विज्ञान और उसका जीवन में महत्व ज्योतिष शास्त्र (jyotish shastr) हमारे ऋषि मुनियों की देन है | हम पर अशीम कृपा कर हमारे ऋषि मुनियों ने