Devshayani Ekadashi Vrat Katha
देवशयनी एकादशी व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि Devshayani Ekadashi Vrat Katha, पूजन विधि और महत्व की संपूर्ण जानकारी। यह पवित्र दिन भगवान विष्णु की योगनिद्रा की शुरुआत करता है […]
देवशयनी एकादशी व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि Devshayani Ekadashi Vrat Katha, पूजन विधि और महत्व की संपूर्ण जानकारी। यह पवित्र दिन भगवान विष्णु की योगनिद्रा की शुरुआत करता है […]
शीर्षक: चाक्षुषोपनिषद मंत्र: कमजोर आँखों के लिए वरदान! जानें विधि और फायदे आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में, हमारी आँखें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। घंटों कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल
लक्ष्मी पंचमी व्रत कथा: धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति का पावन पर्व Lakshmi Panchami Vrat Katha-लक्ष्मी पंचमी का व्रत हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत देवी
लक्ष्मी योग: कुंडली में धन और समृद्धि का रहस्य Laxmi yoga in kundali – हमारे महर्षियों ने बारह राशियों और नव ग्रहों की जन्म कालीन स्थति के अनुसार राशियों और
“क्या आपकी कुंडली में है धन योग? जानें आर्थिक समृद्धि के ज्योतिषीय रहस्य!” Dhan Yoga in hindi – क्या आपकी कुंडली में धन योग है? यह सवाल हर उस व्यक्ति
मंगल गोचर 2024: आपके जीवन में क्या बदलाव लाएगा Mangal Gochar 2024 – मंगल ग्रह 12 जुलाई 2024 को शाम के 07 बजकर 10 मिनिट पर वृषभ राशि में
चन्द्र मंगल योग क्या है, कब बनता है और क्या हैं इसके शुभाशुभ फल Chandra Mangal Yoga – चंद्र मंगल योग ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण योग माना जाता है।
अज्ञात शक्तियों का रहस्य: केतु और आपके करियर का अनोखा संबंध Ketu Se Ajivika Vichar – केतु ग्रह ज्योतिष शास्त्र में छाया ग्रह माना जाता है। यह ग्रह अध्यात्म, मोक्ष,
रहस्यमय राहु: करियर और आजीविका में सफलता कैसे प्राप्त करें Rahu Se Ajivika Vichar – राहु ग्रह ज्योतिष शास्त्र में छाया ग्रह माना जाता है। यह ग्रह भ्रम, रहस्य, और
शनि ग्रह से संबंधित नौकरी, व्यवसाय और आजीविका Shani Se Ajivika Vichar – शनि ग्रह ज्योतिष शास्त्र में कर्म, न्याय, अनुशासन, और देरी का कारक माना जाता है। यह ग्रह
शुक्र ग्रह से संबंधित नौकरी, व्यवसाय और आजीविका Shukra Se Ajivika Vichar – शुक्र ग्रह ज्योतिष शास्त्र में प्रेम, सौंदर्य, कला, धन, और भोग-विलास का कारक माना जाता है। यह
गुरु ग्रह से संबंधित नौकरी, व्यवसाय और आजीविका Guru Se Ajivika Vichar – गुरु ग्रह ज्योतिष शास्त्र में ज्ञान, शिक्षा, धर्म, भाग्य, और विस्तार का कारक माना जाता है। यह
बुध ग्रह से संबंधित नौकरी, व्यवसाय और आजीविका Budh Se Ajivika Vichar – बुध ग्रह ज्योतिष शास्त्र में बुद्धि, संचार, व्यापार, और शिक्षा का कारक माना जाता है। यह ग्रह
मंगल ग्रह से संबंधित नौकरी, व्यवसाय और आजीविका Mangal Se Ajivika Vichar – ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ग्रह साहस, ऊर्जा, शक्ति, वीरता,
चंद्र ग्रह से संबंधित नौकरी, व्यवसाय और आजीविका Chandra Se Ajivika Vichar – चंद्र ग्रह ज्योतिष में मन, भावनाएं, कल्पना, पोषण, देखभाल, और तरल पदार्थों का कारक माना जाता है।
सूर्य ग्रह से संबंधित नौकरी, व्यवसाय और आजीविका: Surya Se Ajivika Vichar – ज्योतिष में सूर्य ग्रह को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ग्रह आत्मा, जीवन शक्ति, नेतृत्व, आत्मविश्वास,
पंचम भाव में केतु और शिक्षा Ketu Pancham Bhav me – वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय भाव,
पंचम भाव में राहु और शिक्षा Rahu Pancham Bhav me – वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय भाव,
पंचम भाव में शनि और शिक्षा Shani Pancham Bhav me – वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय भाव,
पंचम भाव में शुक्र और शिक्षा Shukra Pancham Bhav me – वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय
पंचम भाव में गुरु और शिक्षा Guru Pancham Bhav me – वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय
पंचम भाव में बुध और शिक्षा Budh Pancham Bhav me – वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय
पंचम भाव में मंगल और शिक्षा Mangal Pancham Bhav me – वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय
पंचम भाव में चंद्र और शिक्षा वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय भाव, चतुर्थ भाव, एवं नवम
पंचम भाव में सूर्य और शिक्षा वैदिक ज्योतिष के अनुसार शिक्षा पांचवे भाव से देखते हैं | शिक्षा में अच्छी सफलता के लिए द्वतीय भाव, चतुर्थ भाव, एवं नवम भाव
सफला एकादशी व्रत: सफलता का मार्ग Saphala Ekadashi Vrat Katha – सफला एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है | यह व्रत पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी
बुध का गोचर: 2024 में किन राशियों को मिलेगा लाभ? Mercury Transit 2024 – वर्ष 2024 के शुरुआत में राशि परिवर्तन करने में सबसे पहले ग्रहों के राजकुमार बुध
पद्मिनी एकादशी व्रत विधि एवं कथा Padmini Ekadashi vrat katha – यह एकादशी अधिक मास के शुक्लपक्ष में आती है | इसको पुरुषोत्तम मास, मलमास तथा अधिक मास के नाम
संकष्टी चतुर्थी लिस्ट 2022 Sankashti Chaturthi 2022 List – हमारे हिन्दू धर्म में सभी व्रतों की गणना चन्द्र मास से की जाती है और चन्द्र माह में दो पक्ष होते
प्रदोष व्रत 2022 लिस्ट Pradosh Vvrat 2022 List – प्रदोष व्रत चन्द्र माह की त्रयोदशी को किया जाता है | यह व्रत वर्ष में 24 बार आता है | चन्द्र
एकादशी व्रत लिस्ट 2022 Ekadashi Vrat List 2022 – हमारे चन्द्र मास के अनुसार प्रत्येक माह में दो पक्ष होते हैं जिनके प्रथम पक्ष को कृष्ण पक्ष और
वर्ष 2022 के सर्वार्थ सिद्ध योग Sarvartha Siddhi Yog 2022 – हमारा देश धर्म प्रधान देश है | हमारे सभी कार्य वैदिक रीति से सम्पन्न होते हैं | वैदिक
मुंडन संस्कार के शुभ मुहूर्त वर्ष 2022 Mundan Muhurat 2022 – हमारे हिन्दू धर्म में कुल 16 संस्कार माने गए हैं | मुंडन मुहूर्त इन्हीं संस्कारों में से एक माना
भूमि भवन खरीदने का शुभ मुहूर्त Property Kray Muhurat 2022 – हमारी संस्कृति में कोई भी कार्य बिना मुहूर्त के नहीं किया जाता | हम छोटे से छोटे कार्य भी
वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त 2022 Vahan Kray Muhurat 2022 – वाहन आज हमारे जीवन का एक अंग बन चुका है और अच्छा वाहन हमारा शौक भी | वाहन से
गृह प्रवेश मुहूर्त 2022 Griha Pravesh Muhurat 2022 – हमारा अपना घर यह सपना प्रयेक व्यक्ति का होता है और बहुत ही मुश्किलों के बाद हम अपना घर बना
विवाह मुहूर्त 2022 Shubh Vivah Muhurat 2022 – विवाह जीवन का एक ऐसा बंधन है जो सबसे पवित्र बंधन माना जाता है, और विवाह केवल दो प्राणियों का सम्बन्ध नहीं
2022 में पड़ने वाले गंडमूल दोष Gandmool Dosh 2022 – हमारे वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों का विशेष महत्व माना जाता है | कृष्नामूर्ति पद्धति में तो नक्षत्रों का और भी
पंचक दिनांक 2022 जनवरी से दिसंबर तक Panchak 2022 – हमारा भारत देश धर्म प्रधान देश है | हमारे देश में हर कार्य धर्म- अधर्म का विचार करते हुए किया
वर्ष 2022 के सभी शुभ मुहूर्त Shubh Muhurat 2022 – जब हम किसी भी कार्य को आरम्भ करते हैं उस समय दिन. तिथि, लग्न, ग्रहों की स्थिति आदि हमारे
शुक्र की महादशा के 20 साल: आपकी कुंडली के अनुसार क्या होगा असर? Shukra Mahadasha Ke Prabhav – केंद्र में स्थित शुक्र की महादशा में उत्तम प्रकार के वस्त्र,
शुक्र की महादशा का फल Shukra Mahadasha Fal – शुक्र महादशा का साधारण फल – शुक्र की महादशा में जातक को स्त्री, संतान, धन, समृद्धि और आभूषण वस्त्र आदि
केतु की महादशा का फल Ketu Mahadasha ka Fal – केतु वैदिक ज्योतिष का एक छाया ग्रह है। यह मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, विपरीत परिस्थितियों और कर्मफल का द्योतक है। इसकी
भिन्न-भिन्न भाव एवं राशि में स्थित बुध की महादशा का फल Budh Mahadasha ka fal – केंद्र में स्थित बुध की महादशा में राजाओं से मित्रता, धन-धान्य, स्त्री और पुत्र
बुध की महादशा का फल Budh Mahadasha Fal – बुध की महादशा का साधारण फल – बुध की महादशा में अपने से उम्र में एवं धन में बड़े मनुष्यों से,
भानुसार शनि की महादशा का फल shani mahadasha ka fal – अलग-अलग भावों में स्थित शनि अपनी महादशा में क्या फल देता है | लग्न में स्थित शनि की महादशा
क्या शनि की महादशा से डर लगता है? क्या यह सिर्फ दुर्भाग्य ही लाती है? Shani Mahadasha effects – अगर आपकी कुंडली में शनि की महादशा चल रही है, तो
भावानुसार एवं राशि अनुसार गुरु की महादशा का फल Guru mahadasha ka fal – इस लेख में जानेंगे गुरु अलग-अलग भागों में स्थित होकर अपनी दशा में जातक को क्या
गुरु की महादशा का फल: जानें आपके जीवन पर क्या होगा प्रभाव? Guru Mahadasha fal – क्या आप जानते हैं कि आपकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति आपके जीवन
अलग-अलग भाव में स्थित राहू की महादशा का फल Rahu Mahadasha ka fal – भिन्न-भिन्न भावों में स्थित राहु की दशा का फल – पहले, दुसरे, तीसरे भाव में स्थित
राहू की महादशा का फल Rahu Mahadasha fal – राहू को हमारे ज्योतिष शास्त्र में कोई स्थान प्राप्त नहीं है | न तो राहू की अपनी कोई राशि होती और
भिन्न-भिन्न भाव में स्थित मंगल की महादशा का फल Mangal Mahadasha ka fal – भिन्न-भिन्न भावगत मंगल के रहने से वह अपनी दशा में क्या फल देता है इस लेख
मंगल की महादशा: पराक्रम, संघर्ष और अवसरों का संगम Mangal Mahadasha Fal – ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, पराक्रम, युद्ध, भूमि, साहस और आत्मबल का प्रतीक माना गया
अलग-अलग भाव ने स्थित चन्द्र महादशा का फल Chandra Mahadasha ka fal – पहले, दुसरे, तीसरे भाव में स्थित चंद्रमा की दशा का फल – पथम भाव में स्थित चन्द्रमा
चन्द्र की महादशा का फल – जीवन में सुख, संघर्ष और मानसिक स्थिति पर प्रभाव Chandra Mahadasha fal – चन्द्रमा मन, भावना, माता, परिवार और सुख-सुविधाओं का कारक माना गया
पूर्णिमा व्रत कैसे करें – विधि, लाभ, महत्व और खानपान सहित संपूर्ण जानकारी Purnima Vrat ki Vidhi – पूर्णिमा का व्रत शास्त्रों में अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। चंद्रमा की
दीपावली में करें यह परीक्षित प्रयोग Diwali offers – दीवाली आफर में आपको लक्ष्मी वृद्धि के लिए अजमाया हुआ विशेष प्रयोग प्राप्त होगा | इस प्रयोग में उपयुक्त सभी सामग्री
कोडियों का महत्व kaudi ke totke -कोड़ी जल में पाए जाने वाले जीव का घर है | मुख्यतः कौडियाँ समुद्र में पायी जाती हैं | और उसी समुद्र से माता
पितृ तर्पण की सम्पूर्ण विधि मन्त्रों सहित Pitru Tarpan Vidhi – भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर अश्वनि अमावस्या तक पितर पक्ष 16 दिन का होता है इस अवधि में लोग अपने
भावानुसार सूर्य दशा फल bhavanusar surya mahadasha fal – अलग-अलग भाव में स्थित सूर्य अपनी महादशा में क्या फल देता है इस बारे में जानते हैं | सूर्य यदि लग्न
सूर्य की महादशा का फल Surya Mahadasha fal – वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है | सूर्य आत्मा का कारक होता है और मस्तिष्क
ग्रहों की महादशा फल विधि Mahadasha fal – महादशा फल के साधारण नियम जिस ग्रह की महादशा चल रही है और जन्म कुंडली में वह ग्रह बली हो तो वह
श्री सूक्त पाठ की सही विधि एवं फायदे sri suktam benefits – धन वृद्धि के उपाय में सर्वप्रथम यदि कोई उपाय में सबसे पहले आता है तो वह है श्रीसूक्त
आर्थिक समृद्धि के सरल एवं सटीक उपाय lakshmi prapti ke upay – आज आर्थिक समृद्धि प्रत्येक व्यक्ति की सबसे पहली इच्छा होती है | और सही भी है क्योंकि धन
मंगल दोष के लिए सरल और शक्तिशाली उपाय: जानें क्या करें mangal ke upay – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार सूर्य को राजा कहा गया है उसी प्रकार मंगल
चंद्रमा के मंत्र और उपाय: पाएं मानसिक शांति और सफलता Chandra ke upay – हमारे ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को काल पुरुष का मन कहा गया है | “चंद्रमा मनसो जायत” मन्त्र
ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व, स्वभाव, स्वास्थ्य पर प्रभाव और उपाय Jyotish me Budh grah – ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों का विशेष स्थान है और प्रत्येक ग्रह जीवन
मंगल ग्रह और ज्योतिष Jyotish me mangal grah – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार सूर्य को राजा कहा गया है उसी प्रकार मंगल को मंत्रीं की पदवी प्राप्त है
सूर्य के सरल एवं सटीक उपाय surya ke upay – ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है | काल पुरुष में सूर्य को आत्मा का कारक
27 नक्षत्रों के मंत्र जप संख्या एवं माला 27 nakshatra ke mantra – वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का विशेष महत्व है। ये नक्षत्र न केवल हमारे व्यक्तित्व और भविष्य
नक्षत्रों का चरण अनुसार फल 27 nakshatra faladesh – जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र के जिस चरण में होता है वही जातक का जन्म नक्षत्र चरण माना जाता है
नक्षत्र और उनकी विशेषताएं Nakshatra – कृष्णमूर्ति पद्धति में नक्षत्रों का विशेष महत्व बताया है | इस पद्धति में प्रश्न कुंडली हो या जन्म कुंडली फलादेश करते समय नक्षत्रों का
ग्रहों की रश्मि द्वारा फल Rashmi fal in astrology – रश्मि अर्थात ग्रह की किरण जो गणित द्वारा प्राप्त की जाती है | जिस ग्रह की सबसे ज्यादा रश्मि होती
शास्त्रों एवं ज्मेंयोतिष में चन्द्रमा का महत्व jyotish me chandrama – हमारे शास्त्रों में चंद्रमा का विशेष महत्व माना गया है | चंद्रमा का एक नाम सोम भी है |
ज्योतिष एवं शास्त्रों में सूर्य का महत्व Jyotish me Surya Graha – सूर्य को हमारे वेद शास्त्रों में जगत की आत्मा मन गया है | सूर्य से ही इस पृथ्वी
गंगा दशहरा पूजन विधि एवं कथा ganga dussehra ka mahatva – गंगा जी देव नदी हैं, वह मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए धरती पर आयीं | धरती पर
वट सावित्री व्रत विधि कथा एवं महत्त्व Vat Savitri Vrat Katha-वट सावित्री व्रत विधि एवं कथा – वट वृक्ष को देव वृक्ष माना गया है | शास्त्रों में वर्णन
याददास्त और ज्योतिष: कुंडली से कैसे समझें स्मरण शक्ति की ताकत और कमजोरी Memory and astrology – हर व्यक्ति की याददाश्त एक जैसी नहीं होती। कोई आसानी से सब कुछ
क्या आपकी कुंडली में उच्च शिक्षा योग है Education and astrology – मित्रों इस लेख में जानेंगे जातक की विद्या, कला-कौशल इत्यादि के बारे में यह सर्वविदित है कि विद्या
महापद्म काल सर्प योग का निर्माण mahapadma kaal sarp yog – इस महापद्म काल सर्पयोग नामक योग का निर्माण छटवें भाव से बारहवे भाव तक ग्रहों की स्थिति के कारण
कैसे बनता है पद्म काल सर्प योग padam kaal sarp yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में बनने वाले योगों में काल सर्प योग भी आता है | यह
शंखपाल काल सर्प योग क्या होता है shankhpal kaal sarp yog – चतुर्थ भाव में राहू और दशवें भाव में केतु के आ जाने पर और चतुर्थ भाव और दशवें
वासुकी काल सर्प योग के प्रभाव vasuki kaal sarp yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म पत्रिका के तीसरे भाव में राहू और नवम भाव में केतु के स्थित होने
कैसे बनता है कुलिक काल सर्प योग Kulik Kaal Sarp Yog – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दुसरे भाव में राहू और आठवें भाव में केतु के होने पर तथा इनके
कैसे बनता है अनंत कालसर्प योग Anant Kaal Sarp Yog – अनंत कालसर्प योग प्रथम भाव से सप्तम भाव के मध्य बनता है | जब राहू प्रथम भाव में और
कैसे बनता है काल सर्प योग Kaal Sarp Yog – जब कुंडली में ग्रहों का एक विशेष स्थिति में उदय होता है, या इसे एसा भी कह सकते हैं कि
नवग्रह स्त्रोत पाठ एवं विधि navagraha stotram, इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी वर्गों के मनुष्यों को नवग्रह स्त्रोत का पाठ करना चाहिए | जिन व्यक्तियों को अपनी जन्म
संकट मोचन हनुमान अष्टक पाठ sankat mochan hanuman ashtak, श्री पवन पुत्र हनुमान जी का नाम ही संकटमोचन है | त्रेता से द्वापर तक जब भी देवताओं पर कष्ट पड़ा
संकट नाशक गणेश स्त्रोत के लाभ sankat nashan ganesh stotram, श्री गणेशजी वेद शास्त्रों में प्रथम पूज्य माने जाते हैं | प्रायः सभी शास्त्रों में प्रथम बन्दना गणेशजी की होती
अनेक रोग मन्त्र एक har bimari ka mantra, मानव जीवन में होने वाली समस्याएं या त्रिविध ताप किसी न किसी प्रकार धर्म-अधर्म से जोड़कर देखे जाते हैं | और अधिकतर
श्री तुलसीदास कृत हनुमान बाहुक hanuman bahuk छप्पय सिंधु तरन, सिय-सोच हरन, रबि बाल बरन तनु । भुज बिसाल, मूरति कराल कालहु को काल जनु ॥ गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव
अधि योग क्या है ? (Adhi yoga) – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह भावों में स्थित ग्रह कोई न कोई योग का निर्माण करते हैं | जिनमे से
कैसे बनता है अखण्ड साम्राज्य योग (Akhand samrajya yoga)अखंड साम्राज्य योग वो योग है जो कुंडली में होने पर आपकी सूरत बदल देता है। अखंड साम्राज्य योग होने पर अन्य
रुचक योग की सही जानकारी (Ruchaka yoga) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली के बारह भावों में स्थित ग्रह कोई न कोई योग का निर्माण करते हैं | जिनमे से कुछ
माँ का सुख देने वाले योग- (matr sukh aur jyotish) – इस लेख में माताजी के सुख के बारे में विचार करेंगे कि जातक को माताजी का सुख प्राप्त होगा
कुंडली में अरिष्ट भंग योग (arishta bhanga yoga) – मित्रों पिछले लेख में अर्थात बालारिष्ट योग मैं जाना की ऐसे कौन से योग कुंडली में होते हैं जिससे अल्पायु अर्थात
कुण्डली में अल्पायु योग- (balarishta yoga in kundali) – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की आयु को तीन भागों में विभक्त किया गया है | प्रथम बालारिष्ट या अल्पायु, द्वितीय
कुण्डली में 5 ग्रहों की युति का फल- ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि ग्रह अकेले नहीं बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर जातक
4 Graho Ki Yuti का फल ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति मात्र संयोग नहीं होती, बल्कि यह हमारे कर्म, संस्कार, भविष्य और व्यक्तित्व की सूक्ष्म रूप से
कुण्डली में 3 ग्रहों की युति का फल सूर्य, चन्द्र, मंगल युति का फल-(3 graho ki yuti) 3 graho ki yuti – कुण्डली में सूर्य, चंद्र और मंगल एक
कुण्डली में दो ग्रहों की युति का फल- सूर्य और चंद्र युति का फल- (do graho ki yuti) (do graho ki yuti) – यदि सूर्य और चंद्र एक ही स्थान
प्रथम भाव पर राहु की पूर्ण दृष्टि का फल- (Rahu drishti ka fal) – लग्न भाव को राहु पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक रोगी होते हैं | इन्हें
प्रथम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि का फल- (shani drishti ka fal) – लग्न भाव को शनि पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे व्यक्ति देखने में कुछ सांवले
प्रथम भाव पर शुक्र की पूर्ण दृष्टि का फल- (shukra drishti ka fal) – शुक्र प्रथम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक देखने में सुंदर और
गुरु दृष्टि का फल guru drishti ka fal – हमारे ज्योतिष शास्त्र में गुरु की तीन दृष्टि बतायीं गयीं हैं | जिन्हें पूर्ण दृष्टि मानी जाती है | 1- पंचम
प्रथम भाव पर बुध की पूर्ण दृष्टि का फल- (budh drishti ka fal) – बुध जब लग्न भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे व्यक्ति गणितज्ञ अर्थात गणित
प्रथम भाव पर मंगल की पूर्ण दृष्टि का फल- (mangal drishti ka fal) – प्रथम भाव को मंगल पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक उग्र प्रकृति के
प्रथम भाव पर चन्द्रमा की पूर्ण दृष्टि का फल- (Chandra Drishti ka fal) – जब चंद्रमा प्रथम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है तो ऐसे जातक अधिकतर प्रवासी ही
बारहवें भाव में स्थित चंद्रमा का फल- (moon in 12th house) – बारहवें भाव में अपने मित्र गुरु की राशि में स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक, शुभ कार्यों में
एकादश भाव में चन्द्रमा का फल- (moon in 11th house) – ग्यारहवें भाव में अपने शत्रु शनि की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक दृढसंकल्पित होते हैं अर्थात
प्रथम भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि का फल- (Surya drishti ka fal)-सूर्य यदि प्रथम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो ऐसे जातक रजोगुण प्रधान होते हैं |
unch neech grah fal जन्म के समय ग्रह आकाश में जहां स्थित होते हैं | वैसे ही कुण्डली में स्थित किये जाते हैं | जो ग्रह जिस राशि में होता
ग्रहों का बल कैसे जाने – Bali Graha in Kundali – आज के इस लेख में हम ग्रहों के बलों पर विचार करेंगे ग्रहों के बल कितने प्रकार के होते
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से राहु-केतु का गोचर – (rahu ketu gochar fal) राहु और केतु छाया ग्रह है अन्य ग्रहों की भांति इनका भौतिक अस्तित्व नहीं है | संभवत
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से शनि का गोचर – (shani gochar fal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से शुक्र का गोचर – (shukra gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से गुरु का गोचर – (guru gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से बुध का गोचर – (budh gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से मंगल का गोचर – (mangal gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
जन्मस्थ ग्रहों के ऊपर से चंद्र का गोचर – (Chandra gocharfal) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ विशिष्ट स्थानों पर से गोचर, और उसका स्थिति
सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों के ऊपर से गोचर विचार – (Surya gochar ka jatak par prabhav) सूर्य आदि ग्रहों का जन्म कालीन ग्रहों पर तथा उनसे कुछ
केतु गोचर फल – Ketu Transit Ketu Transit – (ketu gochar) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से
(rahu gochar) Rahu Transit-राहु गोचर फल – ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश
शनि गोचर फल – (Saturn transit) (Saturn transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में
शुक्र गोचर का फल – (Venus transit) (Venus transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि
गुरु गोचर फल – (Jupiter transit) (Jupiter transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में
बुध गोचर का फल – (Mercury transit) (Mercury transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि
(mangal gochar) मंगल गोचर फल – (Mars transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि में
चन्द्र के गोचर का जातक पर प्रभाव (moon transit) ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि से दूसरी राशि
सूर्य के गोचर का जातक पर प्रभाव Sun transit सूर्य गोचर – ब्रह्मांड में स्थित ग्रह अपने अपने मार्ग पर अपनी अपनी गति से सदैव भ्रमण करते हुए एक राशि
दसवें भाव में चन्द्र का फल – moon in 10th house moon in 10th house – दसवें भाव में अपने शत्रु शनि की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से
नवें भाव में चन्द्रमा का फल -moon in 9th house moon in 9th house – नवे भाव में अपने मित्र गुरु की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक
आठवें भाव में चद्रमा का फल – moon in 8th house moon in 8th house – आठवें भाव में अपने मित्र मंगल की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से
सातवें भाव में चंद्रमा का फल -moon in 7th house moon in 7th house-सातवें भाव में अपने सामान्य शुक्र की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक स्त्री सुख
छठे भाव में चंद्रमा का फल – moon in 6th house moon in 6th house-छठे भाव में अपने मित्र बुध की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक शत्रुओं
पंचम भाव चंद्रमा का फल- moon in 5th house moon in 5th house – पांचवे भाव में अपने मित्र सूर्य की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक बड़ा
चतुर्थ भाव में चंद्रमा का फल – moon in 4th house moon in 4th house – चौथे भाव में स्वराशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक को माताजी का
तृतीय भाव में चंद्रमा का फल -moon in 3rd house moon in 3rd house – तीसरे भाव में मित्र बुध की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक के
द्वितीय भाव में स्थित चंद्रमा का फलादेश moon in 2nd house – दूसरे भाव में सामान्य शुक्र की राशि पर स्थित उच्च के चंद्रमा के प्रभाव से जातक बहुत धनी
moon in 1st house (चन्द्रमा प्रथम भाव में) moon in 1st house – भाव में अपने मित्र मंगल की राशि पर स्थित चंद्रमा के प्रभाव से जातक को मानसिक शान्ति
मेष लग्न की कुंडली के द्वादश भाव स्थित सूर्य sun in 12th house – बारहवें भाव में अपने मित्र गुरु की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक का
मेष लग्न की कुंडली के एकादश भाव में स्थित सूर्य sun in 11th house – ग्यारहवें भाव में अपने शत्रु शनि की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक
मेष लग्न की कुंडली के दशम भाव में स्थित सूर्य sun in 10th house – दसवें भाव में अपने शत्रु शनि की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक
मेष लग्न की कुंडली के नवम भाव में स्थित सूर्य sun in 9th house – नवम भाव में अपने मित्र गुरु की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक
मेष लग्न की कुंडली के अष्टम भाव में स्थित सूर्य sun in 8th house – आठवें भाव में मित्र मंगल की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक को
मेष लग्न की कुंडली के सप्तम भाव में स्थित सूर्य sun in 7th house – सातवें भाव में अपने शत्रु शुक्र की राशि में स्थित नीच के सूर्य के प्रभाव
मेष लग्न की कुंडली के षष्ठ भाव में स्थित सूर्य sun in 6th house – छठे भाव में अपने मित्र बुध की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक
मेष लग्न की कुंडली के पंचम भाव में स्थित सूर्य पांचवें भाव में स्थित स्वक्षेत्री सूर्य के प्रभाव से जातक बड़ा विद्वान और बुद्धिमान होता है |पांचवे भाव में (sun
मेष लग्न की कुंडली के चतुर्थ भाव में स्थित सूर्य का फल sun in 4th house – चौथे भाव में सूर्य अपने मित्र चंद्रमा की राशि पर स्थित सूर्य के
मेष लग्न की कुंडली के तीसरे भाव स्थित सूर्य तीसरे भाव में अपने मित्र बुध की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से जातक के बुद्धिवल एवं पराक्रम में वृद्धि
दूसरे भाव में सूर्य का फल – sun in 2nd house – दूसरे भाव में अपने शत्रु शुक्र की राशि पर स्थित सूर्य के प्रभाव से, जातक को आर्थिक कठिनाइयों
जानें पहले घर में सूर्य का फल (sun in 1st house) मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातको के (sun in 1st house) प्रथम भाव में अपने मित्र मंगल की
meen lagna-मीन लग्न के जातकों का शारीरिक गठन – meen lagna – मीन लग्न मैं जन्मलेने वाले ब्यक्तियों का शरीर सुन्दर और सुडौल होता है | मीन लग्न के जातकों
kumbh lagna-कुंभ लग्न के जातकों का शारीरिक गठन – कुम्भ लग्न (kumbh lagna) में जन्म लेने वाले जातकों का शरीर तथा ह्रदय सुन्दर होता है | कुंभ लग्न के जातकों
makar lagna-मकर लग्न के जातकों का शारीरिक गठन – मकर लग्न (makar lagna) में जन्म लेने वाले ब्यक्तियों का निचला अर्ध भाग प्रायः दुबला पतला तथा निर्बल होता है |
dhanu lagna-धनु लग्न के जातकों का शारीरिक गठन – dhanu lagna – धनु लग्न मैं जन्म लेने वाले ब्यक्तियों का गला लम्बा, नाक खड़ी और कान बड़े होते हैं |
vrischika lagna-वृश्चिक लग्न के जातकों का शारीरिक गठन – vrischika lagna – जन्म कुंडली का पहला खाना जिसे हम प्रथम भाव या लग्न के नाम से जानते हैं | ज्योतिषी
tula lagna-तुला लग्न के जातकों का शारीरिक गठन – यदि आपका जन्म (tula lagna) तुला लग्न में हुआ है तो आपकी आकृति लम्बी मुख सुन्दर और लम्बाई लिए हुए ललित
कन्या लग्न के जातकों की विशेषताएं:- कन्या लग्न के जातकों का शारीरिक गठन – Kanya lagna fal यदि आपका जन्म (kanya lagna characteristics) कन्या लग्न में हुआ है तो
free janam kundali analysis 8 – कुण्डली कैसे देखें भाग 8 कुण्डली कैसे देखें के आठवें भाग में आपका पुनः स्वागत है | पिछले भाग में कर्क लग्न के जातक
free janam kundali analysis 7 – कुण्डली कैसे देखें भाग 7 कुण्डली कैसे देखें के सातवें भाग में आपका पुनः स्वागत है | पिछले भाग में मिथुन लग्न के जातक
free janam kundali analysis 6–कुण्डली कैसे देखें भाग 6 कुण्डली कैसे देखें के छटवें भाग में आपका पुनः स्वागत है | पिछले भाग में वृषभ लग्न के जातक के
free janam kundali analysis 5 – कुण्डली कैसे देखें भाग 5 कुण्डली कैसे देखें के पांचवे भाग में आपका पुनः स्वागत है | पिछले भाग में मेष लग्न के जातक
mesh lagna – मेष लग्न के जातको का शारीरिक गठन – यदि आपका जन्म मेष लग्न (mesh lagna) मैं हुआ है तो आपका शारीर प्रायः दुर्बल होना चाहिए | आपकी
अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका (free janam kundali analysis 3) free janam kundali analysis 3-कुण्डली कैसे देखें के तीसरे भाग में आपका पुनः स्वागत है | पिछले दो
अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका free janam kundali analysis part 1 – कुण्डली कैसे देखें भाग दो में आपका स्वागत है | भाग एक में ज्योतिष का परिचय
अपनी कुंडली देखने का सबसे आसान तरीका हमारे इस (free janam kundali analysis part 1) कुण्डली कैसे देखें कार्यक्रम में आपको गणित नहीं पढ़ना है | इसमे सिर्फ आपको अपनी
गुरु ग्रह (guru gochar report) guru gochar – गुरु शब्द सुनते ही मस्तिष्क में एक अलग छवि बनने लगती है| देवताओं से लेकर आज तक गुरु की परम्परा चली आई
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